राजनीति
FCRA बिल पर लोकसभा में तीखी बहस: किरेन रिजीजू और अखिलेश यादव के बीच जोरदार टकराव
ICN24 Newsroom 13 अग॰ 2026, 01:37 am

लोकसभा में FCRA बिल पर चर्चा के दौरान केंद्रीय मंत्री किरेन रिजीजू और सपा नेता अखिलेश यादव के बीच तीखी नोकझोंक हुई। विदेशी चंदे के नियमों पर पक्ष-विपक्ष में भारी हंगामा हुआ।
भारतीय संसद के निचले सदन, लोकसभा में विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (FCRA) संशोधन बिल पर चर्चा के दौरान उस समय स्थिति तनावपूर्ण हो गई, जब केंद्रीय मंत्री किरेन रिजीजू और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। सदन में बिल पर मतदान और बहस के दौरान दोनों नेताओं ने एक-दूसरे पर जमकर प्रहार किए, जिससे सदन की कार्यवाही में काफी हंगामा हुआ।
विवाद की शुरुआत तब हुई जब केंद्रीय मंत्री किरेन रिजीजू ने बिल का पक्ष रखते हुए कहा कि विदेशी फंड का दुरुपयोग देश की सुरक्षा और लोकतांत्रिक ढांचे के खिलाफ नहीं होना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार पारदर्शिता सुनिश्चित करना चाहती है ताकि विदेशी पैसा केवल उन्हीं कार्यों में लगे जिनके लिए वह भेजा गया है। इस पर विपक्ष की ओर से आपत्ति जताते हुए अखिलेश यादव ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाए। यादव ने आरोप लगाया कि सरकार इन नियमों का उपयोग चुनिंदा संगठनों और विपक्षी विचारधारा से जुड़े संस्थानों को निशाना बनाने के लिए कर रही है।
बहस के दौरान किरेन रिजीजू ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि देश की संप्रभुता के साथ कोई समझौता नहीं किया जा सकता। उन्होंने पूर्ववर्ती सरकारों के कामकाज पर भी टिप्पणी की, जिसका अखिलेश यादव ने पुरजोर विरोध किया। यादव ने तर्क दिया कि कड़े नियमों के कारण कई वास्तविक सामाजिक संगठन जो जमीनी स्तर पर काम कर रहे हैं, उन्हें धन प्राप्त करने में अनावश्यक बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है। सदन में शोर-शराबे के बीच दोनों ओर से कई बार व्यक्तिगत कटाक्ष भी किए गए।
ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय के लिए यह घटनाक्रम काफी महत्वपूर्ण है। ऑस्ट्रेलिया में बसे हजारों प्रवासी भारतीय भारत में शिक्षा, स्वास्थ्य और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में काम करने वाले एनजीओ (NGOs) को नियमित रूप से दान भेजते हैं। FCRA नियमों में किसी भी तरह के बदलाव या सख्ती का सीधा असर इन दानदाताओं और उनके द्वारा समर्थित परियोजनाओं पर पड़ता है। ऑस्ट्रेलिया से भारत पैसे भेजने वाले प्रवासी अब इस बात को लेकर चिंतित हैं कि नए प्रावधानों के बाद उनकी सहायता राशि सही समय पर जरूरतमंदों तक पहुँच पाएगी या नहीं।
इस हंगामे के बावजूद, सरकार ने स्पष्ट किया कि FCRA संशोधन का उद्देश्य केवल निगरानी को मजबूत करना है न कि वैध दान को रोकना। वहीं विपक्ष ने इसे लोकतांत्रिक संस्थाओं की आवाज दबाने का एक और प्रयास करार दिया। सदन में मचे इस घमासान ने एक बार फिर विदेशी फंडिंग और राष्ट्रीय सुरक्षा के बीच के जटिल संतुलन पर बहस छेड़ दी है।
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