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झीरम घाटी हमला मामला: 31 अगस्त को आएगा ऐतिहासिक फैसला, विशेष एनआईए कोर्ट ने सुरक्षित रखा निर्णय
ICN24 Newsroom 13 अग॰ 2026, 10:37 pm
झीरम घाटी नक्सली हमले के मामले में रायपुर की विशेष एनआईए अदालत ने तीन दिनों की अंतिम बहस के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है, जो 31 अगस्त को सुनाया जाएगा।
छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में हुए भीषण झीरम घाटी नक्सली हमले के मामले में न्याय की घड़ी नजदीक आ गई है। रायपुर स्थित राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की विशेष अदालत ने इस मामले में चल रही लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। अदालत ने घोषणा की है कि इस बहुचर्चित और संवेदनशील मामले का अंतिम फैसला 31 अगस्त को सुनाया जाएगा। यह निर्णय अभियोजन और बचाव पक्ष के बीच तीन दिनों तक चली सघन और अंतिम बहस के समापन के बाद आया है।
25 मई 2013 को हुई यह घटना स्वतंत्र भारत के इतिहास में सबसे घातक नक्सली हमलों में से एक मानी जाती है। बस्तर की झीरम घाटी में नक्सलियों ने कांग्रेस की 'परिवर्तन यात्रा' के काफिले को निशाना बनाया था। इस हमले में छत्तीसगढ़ कांग्रेस के तत्कालीन शीर्ष नेतृत्व सहित कुल 32 लोगों की जान चली गई थी। मृतकों में पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नंद कुमार पटेल, उनके पुत्र दिनेश पटेल और 'बस्तर टाइगर' के नाम से मशहूर पूर्व मंत्री महेंद्र कर्मा जैसे कद्दावर नेता शामिल थे।
अदालत में पिछले तीन दिनों से चली अंतिम दलीलें काफी महत्वपूर्ण रहीं। एनआईए की ओर से पेश किए गए साक्ष्यों और गवाहों के बयानों पर लंबी चर्चा हुई। बचाव पक्ष ने भी अपने मुवक्किलों के पक्ष में दलीलें पेश कीं। इस मामले की जांच में शुरुआत से ही कई पेचीदगियां रही हैं, जिसमें राज्य सरकार और केंद्रीय एजेंसी एनआईए के बीच क्षेत्राधिकार और जांच के दायरे को लेकर भी कई बार कानूनी टकराव देखा गया है।
ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय, विशेष रूप से छत्तीसगढ़ से ताल्लुक रखने वाले प्रवासियों के लिए यह खबर अत्यंत महत्वपूर्ण है। प्रवासी भारतीय अक्सर अपनी मातृभूमि की सुरक्षा और राजनीतिक स्थिरता को लेकर चिंतित रहते हैं। 2013 के उस भयावह दिन की यादें आज भी कई लोगों के जेहन में ताज़ा हैं, जिन्होंने उस समय भारत के लोकतांत्रिक ढांचे पर हुए इस बड़े प्रहार को महसूस किया था। सिडनी और मेलबर्न जैसे शहरों में बसे छत्तीसगढ़ी डायस्पोरा के बीच इस फैसले को लेकर उत्सुकता बनी हुई है, क्योंकि यह न्याय की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
झीरम हमले ने न केवल छत्तीसगढ़ की राजनीति को बल्कि भारत की आंतरिक सुरक्षा नीति को भी पूरी तरह से बदल दिया था। अब 31 अगस्त को आने वाला फैसला यह तय करेगा कि इस जघन्य अपराध के साजिशकर्ताओं और हमलावरों को उनके किए की क्या सजा मिलती है। कोर्ट के इस आगामी निर्णय पर देश भर की नजरें टिकी हुई हैं, क्योंकि यह नक्सलवाद के खिलाफ चल रही कानूनी लड़ाई में एक मील का पत्थर साबित हो सकता है।
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