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अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए CPT नियमों में अमेरिका की बड़ी सख्ती; भारतीय छात्रों की बढ़ सकती हैं मुश्किलें

ICN24 Newsroom 14 अग॰ 2026, 12:37 am
अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए CPT नियमों में अमेरिका की बड़ी सख्ती; भारतीय छात्रों की बढ़ सकती हैं मुश्किलें

अमेरिकी आव्रजन अधिकारियों ने अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए 'करीकुलर प्रैक्टिकल ट्रेनिंग' (CPT) के नियमों को कड़ा कर दिया है, जिससे हजारों भारतीय छात्र प्रभावित हो सकते हैं।

वाशिंगटन: संयुक्त राज्य अमेरिका के आव्रजन अधिकारियों ने अंतरराष्ट्रीय छात्रों द्वारा उपयोग किए जाने वाले 'करीकुलर प्रैक्टिकल ट्रेनिंग' (CPT) कार्यक्रमों पर अपनी निगरानी कडी कर दी है। डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी (DHS) और इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट (ICE) ने उन शैक्षणिक संस्थानों के खिलाफ जांच तेज कर दी है, जो छात्रों को उनके पाठ्यक्रम की शुरुआत से ही काम करने की अनुमति देते हैं। इसे अक्सर 'डे 1 सीपीटी' (Day 1 CPT) के रूप में जाना जाता है। इस कदम का सीधा असर हजारों भारतीय छात्रों पर पड़ने की संभावना है, जो अमेरिका में उच्च शिक्षा के साथ-साथ कार्य अनुभव प्राप्त करने की इच्छा रखते हैं। नियमों के अनुसार, CPT का उद्देश्य छात्रों को उनके अध्ययन के क्षेत्र से संबंधित व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान करना है। हालांकि, अधिकारियों ने पाया है कि कई कॉलेज और विश्वविद्यालय इसे एक कानूनी खामी की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं ताकि छात्र पढ़ाई के बजाय पूर्णकालिक काम कर सकें। नए दिशा-निर्देशों के तहत, अब कॉलेजों को यह साबित करना होगा कि CPT छात्र के शैक्षणिक पाठ्यक्रम का एक अभिन्न अंग है और यह केवल कार्य वीजा प्राप्त करने का एक वैकल्पिक तरीका नहीं है। भारतीय समुदाय के लिए यह खबर विशेष रूप से चिंताजनक है, क्योंकि अमेरिका में अंतरराष्ट्रीय छात्रों की एक बड़ी संख्या भारत से आती है। विशेष रूप से आईटी और प्रबंधन क्षेत्रों में काम करने वाले कई छात्र CPT का उपयोग करते हैं। इस सख्ती के कारण न केवल छात्रों के वर्तमान दर्जे पर खतरा मंडरा रहा है, बल्कि भविष्य में उनके स्थायी निवास (ग्रीन कार्ड) या H-1B वीजा की आवेदनों पर भी इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि जो छात्र 'वीजा मिल' कहे जाने वाले संदिग्ध संस्थानों में नामांकित हैं, उन्हें सबसे अधिक जोखिम है। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए भी यह एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। ऑस्ट्रेलिया ने हाल ही में अपने छात्र वीजा नियमों और 'जेन्युइन स्टूडेंट' (GS) मानदंडों को कड़ा किया है। अमेरिका के इस ताजा कदम से यह स्पष्ट होता है कि पश्चिमी देश अब अंतरराष्ट्रीय शिक्षा प्रणाली के दुरुपयोग को रोकने के लिए वैश्विक स्तर पर एक जैसी कठोर नीतियां अपना रहे हैं। सिडनी और मेलबर्न में बसे भारतीय परिवारों, जिनके रिश्तेदार अमेरिका में पढ़ रहे हैं, को अब सलाह दी जा रही है कि वे केवल मान्यता प्राप्त और प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों का ही चयन करें। आने वाले महीनों में, अमेरिकी दूतावास और आव्रजन विभाग उन विश्वविद्यालयों का ऑडिट शुरू कर सकते हैं जहाँ CPT नामांकन की संख्या असामान्य रूप से अधिक है। छात्रों को सलाह दी गई है कि वे अपने 'डेजिग्नेटेड स्कूल ऑफिशियल' (DSO) से संपर्क करें और सुनिश्चित करें कि उनका रोजगार सभी संघीय नियमों का पालन करता है। किसी भी उल्लंघन की स्थिति में छात्रों को निर्वासन (deportation) या भविष्य में अमेरिका में प्रवेश पर प्रतिबंध का सामना करना पड़ सकता है।
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