राजनीति
ओपी राजभर का अखिलेश यादव पर तीखा हमला: 'दो बार विफल रहने के बाद अब उनके पास कोई काम नहीं'
ICN24 Newsroom 5 जुल॰ 2026, 10:31 pm

सुभासपा प्रमुख ओपी राजभर ने अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए कहा कि वे दो बार सरकार बनाने में विफल रहे हैं और अब उनके पास कोई ठोस मुद्दा नहीं बचा है।
उत्तर प्रदेश की राजनीति में बयानबाजी का दौर एक बार फिर तेज हो गया है। सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव पर जमकर निशाना साधा है। राजभर ने हाल ही में भाजपा नेता नितिन नबीन के दौरे पर अखिलेश यादव द्वारा उठाए गए सवालों का जवाब देते हुए उन्हें 'बेरोजगार' तक कह डाला। राजभर का यह बयान ऐसे समय में आया है जब राज्य में आगामी चुनावों और राजनीतिक गठबंधन को लेकर सरगर्मियां तेज हैं।
राजभर ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि अखिलेश यादव के पास फिलहाल कोई काम नहीं बचा है। उन्होंने सपा अध्यक्ष की पिछली विफलताओं को रेखांकित करते हुए कहा कि अखिलेश यादव दो बार सरकार बनाने की कोशिशों में नाकाम रहे हैं। राजभर के अनुसार, जो व्यक्ति बार-बार जनता का विश्वास जीतने में असफल रहा हो, उसे दूसरों के दौरों या रणनीतियों पर सवाल उठाने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि हार के बाद हताशा में इस तरह के बयान देना उनकी मजबूरी बन गई है।
सीटों के बंटवारे के मुद्दे पर बोलते हुए राजभर ने विपक्षी गठबंधन की एकता पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी और उनके सहयोगी दलों के बीच सीटों को लेकर अभी से खींचतान शुरू हो गई है। राजभर का दावा है कि विपक्षी खेमे में नेतृत्व और भविष्य की योजनाओं को लेकर भारी अनिश्चितता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि एनडीए गठबंधन में सब कुछ तय है और वे पूरी मजबूती के साथ आगे बढ़ रहे हैं। राजभर ने यह भी संकेत दिया कि आने वाले समय में विपक्षी गठबंधन के कई और नेता पाला बदल सकते हैं।
भारत के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश की राजनीति का प्रभाव केवल देश के भीतर ही नहीं, बल्कि विदेशों में रह रहे प्रवासी भारतीयों पर भी पड़ता है। ऑस्ट्रेलिया में बसे उत्तर प्रदेश मूल के भारतीयों के लिए यह राजनीतिक घटनाक्रम अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि राज्य की स्थिरता और विकास सीधे तौर पर उनके पैतृक घरों और निवेशों को प्रभावित करती है। सिडनी और मेलबर्न जैसे शहरों में भारतीय समुदाय अक्सर इन राजनीतिक चर्चाओं में सक्रिय रूप से भाग लेता है। राजभर का यह ताजा हमला यह दर्शाता है कि 2024 के बाद की राजनीतिक जमीन को तैयार करने के लिए सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जुबानी जंग अभी और तेज होगी।
अंत में, राजभर ने दोहराया कि उत्तर प्रदेश की जनता अब विकास और सुशासन के साथ है। उन्होंने अखिलेश यादव को सलाह दी कि वे दूसरों की कमियां निकालने के बजाय अपनी पार्टी के भीतर बढ़ रहे असंतोष पर ध्यान दें। उत्तर प्रदेश की सियासत में राजभर का यह बयान निश्चित रूप से नई बहस को जन्म देगा, जिससे समाजवादी पार्टी और भाजपा-सुभासपा गठबंधन के बीच की खाई और गहरी होने की संभावना है।
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