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डेलॉयट सर्वे: भारत में GST अनुपालन को नई दिशा देगा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI)
ICN24 Newsroom 5 जुल॰ 2026, 05:31 pm

डेलॉयट के ताजा सर्वेक्षण के अनुसार, भारतीय कर प्रणाली अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की ओर रुख कर रही है, जिससे GST अनुपालन अधिक सटीक और सुगम हो जाएगा।
भारत में वस्तु एवं सेवा कर (GST) के लागू होने के नौ साल पूरे होने के करीब, देश का कर ढांचा एक और बड़े तकनीकी बदलाव की दहलीज पर खड़ा है। डेलॉयट द्वारा किए गए एक हालिया सर्वेक्षण के अनुसार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) अब भारतीय कर अनुपालन पारिस्थितिकी तंत्र में एक गेम-चेंजर के रूप में उभर रहा है। 2017 में अपनी शुरुआत के बाद से, GST ने भारतीय अर्थव्यवस्था को एक एकीकृत बाजार में बदलने का काम किया है, लेकिन अब ध्यान केवल कर दरों से हटकर तकनीकी नवाचारों पर केंद्रित हो गया है।
सर्वेक्षण में यह बात सामने आई है कि भारतीय व्यवसाय अब केवल कर स्लैब में बदलाव की प्रतीक्षा नहीं कर रहे हैं, बल्कि वे ऐसे समाधानों की तलाश में हैं जो अनुपालन की जटिलताओं को कम कर सकें। AI और मशीन लर्निंग (ML) के एकीकरण से न केवल डेटा इनपुट की त्रुटियां कम होंगी, बल्कि यह वास्तविक समय में विसंगतियों की पहचान करने में भी मदद करेगा। यह बदलाव विशेष रूप से उन प्रवासी भारतीयों और ऑस्ट्रेलियाई-भारतीय व्यवसायियों के लिए महत्वपूर्ण है जिनके व्यापारिक हित दोनों देशों में फैले हुए हैं। भारत में सरल और पारदर्शी कर प्रणाली विदेशी निवेश को बढ़ावा देने में एक प्रमुख कारक साबित हो सकती है।
डेलॉयट की रिपोर्ट के मुताबिक, अधिकांश व्यापारिक दिग्गजों का मानना है कि AI आधारित ऑटोमेशन से 'इनपुट टैक्स क्रेडिट' (ITC) के दावों में सटीकता आएगी और कर अधिकारियों के साथ विवादों में कमी आएगी। वर्तमान में, कई कंपनियों को मैन्युअल डेटा मिलान और जटिल फॉर्म भरने की प्रक्रियाओं के कारण चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। AI इन प्रक्रियाओं को स्वचालित करके न केवल समय की बचत करेगा, बल्कि कर चोरी रोकने के लिए सरकार के प्रयासों को भी मजबूती देगा।
ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय के लिए, जो अक्सर भारत में अपने निवेश या स्टार्टअप्स का संचालन करते हैं, यह तकनीकी प्रगति एक बड़ी राहत लेकर आ सकती है। भारत के कर प्रशासन में बढ़ती डिजिटल परिपक्वता का अर्थ है कि सीमा पार से व्यापार करना और रिपोर्टिंग करना पहले की तुलना में कहीं अधिक आसान हो जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि 'GST 2.0' का यह दौर पूरी तरह से डेटा-संचालित होगा, जहां इंटेलिजेंट एल्गोरिदम संदिग्ध लेनदेन की तुरंत पहचान कर सकेंगे।
निष्कर्ष के रूप में, डेलॉयट का यह सर्वेक्षण संकेत देता है कि भारत अब वैश्विक कर मानकों की ओर तेजी से बढ़ रहा है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का यह उपयोग न केवल घरेलू कंपनियों के लिए बल्कि अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के लिए भी विश्वास का वातावरण तैयार करेगा। जैसे-जैसे भारतीय अर्थव्यवस्था पांच ट्रिलियन डॉलर के लक्ष्य की ओर बढ़ रही है, तकनीक आधारित कर सुधार इसकी रीढ़ की हड्डी साबित होंगे।
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