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हुंडई क्रेटा EV अब ₹10.99 लाख में: जानें क्या है BaaS मॉडल और कैसे कम होगी आपकी जेब पर लागत

ICN24 Newsroom 5 जुल॰ 2026, 04:31 pm
हुंडई क्रेटा EV अब ₹10.99 लाख में: जानें क्या है BaaS मॉडल और कैसे कम होगी आपकी जेब पर लागत

हुंडई ने भारत में क्रेटा इलेक्ट्रिक के लिए 'बैटरी-एज़-ए-सर्विस' विकल्प पेश किया है, जिससे इसकी शुरुआती कीमत घटकर 10.99 लाख रुपये रह गई है।

हुंडई मोटर इंडिया ने भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए एक बड़ा दांव खेला है। कंपनी ने अपनी लोकप्रिय एसयूवी क्रेटा के इलेक्ट्रिक अवतार (Creta EV) के लिए 'बैटरी-एज़-ए-सर्विस' (BaaS) प्रोग्राम की घोषणा की है। इस नई पहल के तहत, क्रेटा EV की शुरुआती एक्स-शोरूम कीमत घटकर मात्र 10.99 लाख रुपये रह गई है, जो इसे बाजार में मौजूद कई पारंपरिक पेट्रोल और डीजल मिड-साइज एसयूवी के बराबर खड़ा कर देती है। BaaS मॉडल का मुख्य उद्देश्य इलेक्ट्रिक वाहनों की शुरुआती खरीद लागत को कम करना है। आमतौर पर, एक इलेक्ट्रिक कार की कुल कीमत का लगभग 30 से 40 प्रतिशत हिस्सा उसकी बैटरी का होता है। BaaS के तहत, ग्राहक को कार खरीदते समय बैटरी की पूरी कीमत नहीं चुकानी पड़ती। इसके बजाय, ग्राहक बैटरी को किराए पर लेता है और उसके उपयोग के हिसाब से भुगतान करता है। हुंडई ने क्रेटा EV के लिए 3.90 रुपये प्रति किलोमीटर का रेंटल चार्ज निर्धारित किया है। इसका मतलब है कि आप जितना अधिक वाहन चलाएंगे, उतना ही भुगतान करेंगे, जो कि मोबाइल डेटा प्लान की तरह काम करता है। यह मॉडल उन ग्राहकों के लिए बेहद फायदेमंद है जो ईवी की उच्च शुरुआती लागत के कारण इसे खरीदने से कतराते थे। 10.99 लाख रुपये की आकर्षक कीमत के साथ, हुंडई न केवल अन्य ईवी निर्माताओं जैसे टाटा मोटर्स और एमजी को टक्कर दे रही है, बल्कि उन ग्राहकों को भी लुभा रही है जो हुंडई क्रेटा के पेट्रोल मॉडल पर विचार कर रहे थे। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत जैसे कीमत के प्रति संवेदनशील बाजार में यह कदम गेम-चेंजर साबित हो सकता है। क्रेटा EV के तकनीकी पहलुओं की बात करें तो, यह एक शक्तिशाली इलेक्ट्रिक मोटर और आधुनिक फीचर्स से लैस है। यह वाहन एक बार फुल चार्ज होने पर लंबी दूरी तय करने का वादा करता है। बास मॉडल के साथ भी, ग्राहकों को वही परफॉरमेंस और आराम मिलेगा जिसके लिए क्रेटा जानी जाती है। इसके अलावा, हुंडई ने बैटरी की वारंटी और लाइफसाइकिल मैनेजमेंट की जिम्मेदारी खुद ली है, जिससे ग्राहकों को बैटरी खराब होने या उसके बदलने के खर्च की चिंता नहीं रहेगी। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए भी यह खबर महत्वपूर्ण है। हालांकि ऑस्ट्रेलिया में इलेक्ट्रिक वाहनों का बाजार तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन वहां अभी भी BaaS जैसे मॉडल व्यापक रूप से उपलब्ध नहीं हैं। भारत में इस तरह के प्रयोगों की सफलता भविष्य में वैश्विक स्तर पर, विशेषकर उन देशों में जहां ईवी की कीमतें अधिक हैं, नए वितरण मॉडल का मार्ग प्रशस्त कर सकती है। साथ ही, जो एनआरआई भारत में अपने परिवारों के लिए वाहन खरीदने की योजना बना रहे हैं, उनके लिए यह एक किफायती और आधुनिक विकल्प बनकर उभरा है। कुल मिलाकर, हुंडई का यह कदम भारत में 'इलेक्ट्रिक मोबिलिटी' को आम जन तक पहुंचाने की दिशा में एक साहसिक प्रयास है। कम शुरुआती कीमत और उपयोग-आधारित रेंटल मॉडल के साथ, क्रेटा EV भारतीय सड़कों पर एक नई क्रांति ला सकती है। आने वाले महीनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि भारतीय उपभोक्ता इस 'बैटरी रेंटल' अवधारणा को कितनी सहजता से अपनाते हैं।
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