राजनीति
नीट पेपर लीक मामला: शिमला में एसएफआई का जोरदार प्रदर्शन, शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग
ICN24 Newsroom 5 जुल॰ 2026, 08:31 pm

शिमला में एसएफआई ने नीट परीक्षा में हुई धांधली के खिलाफ उपायुक्त कार्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन किया और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग की।
हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में शनिवार को नीट-यूजी (NEET-UG) परीक्षा में हुई कथित धांधली और पेपर लीक मामले को लेकर माहौल गर्माया रहा। स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) की राज्य समिति के बैनर तले बड़ी संख्या में छात्रों ने उपायुक्त कार्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार और राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (एनटीए) के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की।
एसएफआई के पदाधिकारियों ने प्रदर्शन के दौरान आरोप लगाया कि देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा में जिस तरह की अनियमितताएं सामने आई हैं, उसने लाखों छात्रों के भविष्य को दांव पर लगा दिया है। छात्रों का कहना है कि यह केवल एक प्रशासनिक चूक नहीं है, बल्कि यह देश की शिक्षा प्रणाली और सरकारी संस्थानों की विश्वसनीयता पर एक बड़ा हमला है। शिमला में हुए इस प्रदर्शन में छात्रों ने मांग की कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष न्यायिक जांच होनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।
एसएफआई नेताओं ने अपने संबोधन में कहा कि पेपर लीक की घटनाओं ने उन मेहनती छात्रों का मनोबल तोड़ दिया है जो सालों से इस परीक्षा की तैयारी करते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि एनडीए सरकार के कार्यकाल में प्रतियोगी परीक्षाओं की शुचिता बार-बार भंग हो रही है। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (एनटीए) को तत्काल भंग किया जाना चाहिए और परीक्षा आयोजित करने की प्रक्रिया में आमूल-चूल परिवर्तन किए जाने चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
शिमला के इस विरोध प्रदर्शन का असर सोशल मीडिया पर भी देखने को मिला, जहां हिमाचल के छात्र समुदाय ने अपनी नाराजगी जाहिर की। उल्लेखनीय है कि नीट परीक्षा परिणाम आने के बाद से ही देशभर के विभिन्न हिस्सों में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। ग्रेस मार्क्स देने के तरीके और एक ही सेंटर से कई टॉपर्स निकलने जैसे मुद्दों ने विवाद को और गहरा दिया है। एसएफआई का कहना है कि जब तक छात्रों को न्याय नहीं मिल जाता और शिक्षा मंत्री अपने पद से हट नहीं जाते, उनका आंदोलन जारी रहेगा।
ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय के लिए भी यह खबर चिंता का विषय है। कई प्रवासी भारतीय परिवारों के बच्चे भारत में उच्च शिक्षा प्राप्त करने या वहां की मेडिकल सीटों के लिए होने वाली प्रतिस्पर्धा पर नजर रखते हैं। भारतीय शिक्षा तंत्र में इस तरह की अस्थिरता और भ्रष्टाचार की खबरें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी देश की छवि को प्रभावित करती हैं। शिमला में हुआ यह प्रदर्शन इसी व्यापक जन-आक्रोश का हिस्सा है जो अब पूरे देश में फैल चुका है।
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