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‘पंडवानी अम्मा’ तीजन बाई का निधन: पीएम मोदी और सीएम साय ने दी श्रद्धांजलि, भारतीय लोककला के एक युग का अंत
ICN24 Newsroom 5 जुल॰ 2026, 09:31 pm

छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान और पद्म विभूषण से सम्मानित विख्यात पंडवानी गायिका डॉ. तीजन बाई का निधन हो गया है। प्रधानमंत्री मोदी ने इसे कला जगत की अपूरणीय क्षति बताया है।
छत्तीसगढ़ की माटी की खुशबू को सात समंदर पार तक पहुँचाने वाली विख्यात पंडवानी गायिका और पद्म विभूषण डॉ. तीजन बाई अब हमारे बीच नहीं रहीं। भारतीय लोककला की सशक्त आवाज मानी जाने वाली तीजन बाई का निधन कला और संस्कृति जगत के लिए एक युग के अंत जैसा है। उनके निधन की खबर मिलते ही देशभर में शोक की लहर दौड़ गई है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने रायपुर स्थित एम्स पहुँचकर महान कलाकार को अंतिम विदाई दी और उनके परिजनों को ढांढस बंधाया।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने डॉ. तीजन बाई के निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की है। प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि तीजन बाई ने न केवल छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक संस्कृति को सहेजा, बल्कि उसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक नई पहचान भी दी। उनका जाना कला जगत के लिए एक ऐसी अपूरणीय क्षति है जिसकी भरपाई संभव नहीं है। उन्होंने महाभारत की गाथाओं को जिस आत्मीयता और ऊर्जा के साथ प्रस्तुत किया, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बना रहेगा।
डॉ. तीजन बाई का जन्म छत्तीसगढ़ के पाटन तहसील के गनियारी गाँव में हुआ था। उन्होंने उस दौर में पंडवानी गायन की कपालिक शैली को अपनाया, जब महिलाओं के लिए मंच पर प्रस्तुति देना एक बड़ी चुनौती माना जाता था। वे पंडवानी की पहली महिला कलाकार थीं जिन्होंने खड़े होकर अपनी विधा का प्रदर्शन किया। उनके हाथ में तंबूरा और उनके कंठ से निकलने वाली महाभारत की कथाएं श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर देती थीं। उनकी कला के प्रति समर्पण का ही परिणाम था कि उन्हें भारत सरकार द्वारा पद्म श्री, पद्म भूषण और फिर देश के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से नवाजा गया।
ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय के लिए भी तीजन बाई का जाना एक व्यक्तिगत क्षति जैसा है। सिडनी, मेलबर्न और ब्रिस्बेन जैसे शहरों में भारतीय लोककला प्रेमी अक्सर उनके वीडियो और प्रदर्शनों के माध्यम से अपनी जड़ों से जुड़े रहते हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व करने वाली तीजन बाई ने मॉरीशस, फ्रांस, स्विट्जरलैंड और कई अन्य देशों में अपनी कला का लोहा मनवाया था। प्रवासी भारतीयों के बीच उन्हें एक ऐसी कलाकार के रूप में देखा जाता था जिन्होंने क्षेत्रीय सीमाओं को तोड़कर अपनी लोक शैली को वैश्विक मंच पर सम्मान दिलाया।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि तीजन बाई केवल छत्तीसगढ़ की ही नहीं, बल्कि पूरे विश्व की धरोहर थीं। उन्होंने राज्य सरकार की ओर से उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक अस्मिता को वैश्विक पहचान दिलाने में उनका योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा। उनके निधन से छत्तीसगढ़ के लोक संगीत का एक गौरवशाली अध्याय समाप्त हो गया है।
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