राजनीति
शिवसेना (यूबीटी) संकट: स्थापना दिवस समारोह से 6 सांसद नदारद, उद्धव ठाकरे गुट को लगा एक और बड़ा झटका
ICN24 Newsroom 20 जून 2026, 04:37 am

शिवसेना के 58वें स्थापना दिवस पर उद्धव ठाकरे गुट के 6 सांसदों की अनुपस्थिति ने पार्टी में एक और बड़ी फूट की अटकलों को हवा दे दी है।
महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। शिवसेना (यूबीटी) के प्रमुख उद्धव ठाकरे को उस समय एक बड़े झटके का सामना करना पड़ा, जब पार्टी के 58वें स्थापना दिवस के महत्वपूर्ण अवसर पर उनके गुट के छह सांसद कार्यक्रम से नदारद रहे। इस अनुपस्थिति ने राजनीतिक गलियारों में इन अटकलों को जन्म दे दिया है कि पार्टी में एक और बड़ी टूट की पटकथा लिखी जा रही है।
मुंबई में आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य पार्टी की एकजुटता और भविष्य की रणनीति को प्रदर्शित करना था, लेकिन प्रमुख नेताओं की गैरमौजूदगी ने नेतृत्व की चिंताएं बढ़ा दी हैं। सूत्रों के अनुसार, अनुपस्थित रहने वाले ये सांसद मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले गुट के संपर्क में बताए जा रहे हैं। यदि ये सांसद दलबदल करते हैं, तो यह 2022 के विद्रोह के बाद उद्धव ठाकरे के लिए अब तक का सबसे बड़ा नुकसान साबित होगा, जिसने तत्कालीन महा विकास अघाड़ी (MVA) सरकार को गिरा दिया था।
ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय, विशेष रूप से महाराष्ट्र से ताल्लुक रखने वाले प्रवासियों के लिए यह घटनाक्रम काफी महत्वपूर्ण है। सिडनी, मेलबर्न और पर्थ जैसे शहरों में बसे मराठी भाषी समुदाय महाराष्ट्र की राजनीतिक स्थिरता को करीब से देखते हैं, क्योंकि इसका सीधा असर राज्य में निवेश और विकास परियोजनाओं पर पड़ता है। कई प्रवासी भारतीयों का मानना है कि इस तरह की राजनीतिक अस्थिरता राज्य की छवि और प्रशासनिक कार्यकुशलता को प्रभावित कर सकती है।
उद्धव ठाकरे के करीबी सहयोगियों ने इन खबरों को निराधार बताते हुए कहा है कि कुछ सांसद व्यक्तिगत कारणों या पहले से तय कार्यक्रमों की वजह से शामिल नहीं हो पाए। हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी विधानसभा चुनावों से पहले इस तरह की बगावत पार्टी के मनोबल को तोड़ सकती है। शिवसेना के दोनों गुट अब असली 'शिवसेना' होने और बालासाहेब ठाकरे की विरासत को आगे बढ़ाने का दावा कर रहे हैं।
फिलहाल, उद्धव गुट के लिए सबसे बड़ी चुनौती अपने मौजूदा कुनबे को बचाए रखना है। चुनाव आयोग और अदालत के फैसलों के बीच, यह नई आंतरिक कलह पार्टी के अस्तित्व की लड़ाई को और कठिन बना सकती है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि क्या ये छह सांसद पाला बदलते हैं या उद्धव ठाकरे अपनी रणनीति से इस संभावित फूट को रोकने में सफल होते हैं।
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