राजनीति
RSS दफ्तरों पर हमले की बड़ी साजिश का खुलासा: दुबई से मिले थे निर्देश, रांची के बाद लखनऊ था अगला निशाना
ICN24 Newsroom 20 जून 2026, 05:56 pm
रांची में आरएसएस कार्यालय पर हुए हमले की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। पुलिस के मुताबिक, इस हमले के तार दुबई से जुड़े हैं और अगला निशाना लखनऊ था।
झारखंड की राजधानी रांची में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के कार्यालय पर हाल ही में हुए पेट्रोल बम हमले के मामले में पुलिस ने एक चौंकाने वाला खुलासा किया है। पुलिस जांच में यह बात सामने आई है कि यह हमला कोई स्थानीय रंजिश या छिटपुट घटना नहीं थी, बल्कि दुबई में बैठी एक कट्टरपंथी इकाई द्वारा रची गई एक सोची-समझी अंतरराष्ट्रीय साजिश का हिस्सा थी। गिरफ्तार आरोपी से पूछताछ के बाद यह स्पष्ट हुआ है कि रांची के बाद साजिशकर्ताओं का अगला बड़ा निशाना उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में स्थित संघ का कार्यालय था।
पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए मुख्य आरोपी अमन अंसारी उर्फ गोलू ने पूछताछ के दौरान स्वीकार किया है कि उसे हमले के निर्देश दुबई से मिल रहे थे। जांच अधिकारियों के अनुसार, इस पूरी साजिश का मास्टरमाइंड दुबई में बैठा 'तहरीक-ए-तालिबान हिंदुस्तान' (TTH) का गुर्गा आवेश राजपूत उर्फ राणा और उसका सहयोगी सहजाद उर्फ शाहनवाज आलम उर्फ भट्ठी है। इन दोनों ने ही अमन अंसारी और उसके साथियों को हमले के लिए उकसाया और संसाधनों की व्यवस्था करने के निर्देश दिए थे। यह जानकारी सुरक्षा एजेंसियों के लिए चिंता का विषय है, क्योंकि यह भारत के भीतर अस्थिरता पैदा करने के विदेशी प्रयासों की ओर इशारा करती है।
पूछताछ में एक और महत्वपूर्ण तथ्य यह सामने आया है कि आरोपियों ने पहले संघ कार्यालय पर फायरिंग (गोलीबारी) करने की योजना बनाई थी। हालांकि, बाद में सुरक्षा व्यवस्था और पकड़े जाने के डर से इस योजना को बदल दिया गया। मास्टरमाइंड के निर्देश पर फायरिंग की जगह पेट्रोल बम (मोलोटोव कॉकटेल) का उपयोग करने का निर्णय लिया गया, ताकि हमला भी हो जाए और हमलावरों को भागने का मौका भी मिल सके। 17 जून को रांची में इस हमले को अंजाम देने के बाद, अमन अंसारी और उसका साथी सैफ अंसारी उसी दिन दोपहर में ट्रेन के जरिए कानपुर फरार हो गए थे।
पुलिस के मुताबिक, इस गिरोह का नेटवर्क केवल झारखंड तक ही सीमित नहीं है। रांची में सफलता मिलने के बाद, इन्हें लखनऊ में इसी तरह के हमले को अंजाम देने के स्पष्ट निर्देश मिले थे। सुरक्षा एजेंसियों ने अब इस नेटवर्क के अन्य सदस्यों की तलाश तेज कर दी है और दुबई स्थित हैंडलर्स के बारे में जानकारी जुटाने के लिए केंद्रीय जांच एजेंसियों के साथ समन्वय किया जा रहा है।
यह घटना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रह रहे भारतीय समुदाय के लिए भी एक चेतावनी है कि किस तरह डिजिटल माध्यमों का उपयोग करके युवाओं को गुमराह किया जा रहा है और सीमा पार से कट्टरपंथी विचारधारा को बढ़ावा दिया जा रहा है। ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय प्रवासियों के लिए भी यह खबर प्रासंगिक है, क्योंकि वे अक्सर भारत में कानून-व्यवस्था और सामाजिक समरसता की स्थिति को लेकर चिंतित रहते हैं। फिलहाल, पुलिस अन्य फरार आरोपियों की तलाश में छापेमारी कर रही है और लखनऊ सहित अन्य संवेदनशील शहरों में सुरक्षा बढ़ा दी गई है।
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