राजनीति
भारत ने पाक राष्ट्रपति जरदारी के बयान को बताया ‘भड़काऊ’, कहा- हमारे आंतरिक मामलों में दखल न दे पाकिस्तान
ICN24 Newsroom 20 जून 2026, 07:11 pm
भारत ने पाकिस्तानी राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी द्वारा वाराणसी की मस्जिद को लेकर दिए गए बयान की कड़ी निंदा की है। विदेश मंत्रालय ने इसे नफरत फैलाने वाला और आंतरिक मामलों में दखल बताया है।
भारत और पाकिस्तान के बीच कूटनीतिक तनाव एक बार फिर गहरा गया है। भारत ने पाकिस्तानी राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के उस बयान पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है, जिसमें उन्होंने वाराणसी की एक मस्जिद की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई थी। भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) ने शनिवार को एक आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर जरदारी के दावों को पूरी तरह से निराधार और नफरत फैलाने वाला करार दिया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पाकिस्तान को भारत के आंतरिक मामलों पर टिप्पणी करने का कोई नैतिक या कानूनी अधिकार नहीं है।
हाल ही में पाकिस्तानी राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने सार्वजनिक मंच से भारत में अल्पसंख्यकों के अधिकारों और विशेष रूप से वाराणसी की मस्जिद की स्थिति पर टिप्पणी की थी। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की थी। इस पर पलटवार करते हुए भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा कि पाकिस्तान की यह बयानबाजी बेतुकी और हास्यास्पद है, खासकर तब जब पूरी दुनिया जानती है कि पाकिस्तान में मानवाधिकारों की क्या स्थिति है। भारत ने पाकिस्तान को अपनी ऊर्जा अपने देश की समस्याओं को सुलझाने और वहां के अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में लगाने की सलाह दी है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि पाकिस्तान का अपना मानवाधिकार रिकॉर्ड बेहद चिंताजनक रहा है। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान में ईशनिंदा कानूनों के दुरुपयोग, अल्पसंख्यकों के जबरन धर्मांतरण और उनके पूजा स्थलों पर हमलों के मुद्दे बार-बार उठते रहे हैं। ऐसे में पाकिस्तान द्वारा भारत जैसे लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र को अल्पसंख्यकों के अधिकारों पर उपदेश देना विरोधाभासी है। भारत ने स्पष्ट किया है कि वाराणसी या देश के किसी भी अन्य हिस्से से जुड़े मुद्दे भारत की न्यायिक प्रक्रियाओं और संवैधानिक मर्यादाओं के अधीन हैं, जिनमें किसी बाहरी हस्तक्षेप की गुंजाइश नहीं है।
ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय के लिए भी यह घटनाक्रम महत्वपूर्ण है। सिडनी, मेलबर्न और पर्थ जैसे शहरों में रहने वाले प्रवासी भारतीय अक्सर दक्षिण एशिया में शांति और स्थिरता की कामना करते हैं। इस तरह के भड़काऊ बयान न केवल दोनों देशों के रिश्तों में कड़वाहट घोलते हैं, बल्कि वैश्विक स्तर पर रह रहे दोनों समुदायों के बीच भी अनावश्यक तनाव पैदा कर सकते हैं। आईएनसी24 (ICN24) से बातचीत में कुछ समुदाय प्रमुखों ने कहा कि पाकिस्तान को धार्मिक भावनाओं को भड़काने के बजाय द्विपक्षीय मुद्दों पर जिम्मेदारी से व्यवहार करना चाहिए।
विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान अपनी घरेलू राजनीतिक अस्थिरता और आर्थिक संकट से जनता का ध्यान भटकाने के लिए अक्सर भारत विरोधी कार्ड खेलता है। भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर हमेशा यह रुख अपनाया है कि वह अपने पड़ोसियों के साथ शांतिपूर्ण संबंध चाहता है, लेकिन संप्रभुता और आंतरिक मामलों में किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार्य नहीं है। विदेश मंत्रालय ने इस बात पर जोर दिया है कि पाकिस्तान अपनी सीमाओं के भीतर कट्टरपंथ और असहिष्णुता को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए, न कि भारत की एकता और अखंडता को निशाना बनाए।
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