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पीएम मोदी की सराहना पर घिरे शशि थरूर, नाविकों के मुद्दे को लेकर कांग्रेस और भाजपा में छिड़ी जुबानी जंग
ICN24 Newsroom 20 जून 2026, 08:40 pm
कांग्रेस सांसद शशि थरूर के एक ताजा बयान ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है, जिसमें उन्होंने भारतीय नाविकों के मुद्दे पर प्रधानमंत्री मोदी की प्रशंसा की है।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और तिरुवनंतपुरम से सांसद शशि थरूर एक बार फिर अपनी ही पार्टी के लिए असहज स्थिति पैदा करने के कारण सुर्खियों में हैं। थरूर ने हाल ही में एक सार्वजनिक मंच पर दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ बातचीत के दौरान भारतीय नागरिक नाविकों (civilian sailors) की सुरक्षा और उनके हितों का मुद्दा प्रमुखता से उठाया था। थरूर का यह बयान कांग्रेस के आधिकारिक रुख के ठीक विपरीत माना जा रहा है, विशेष रूप से राहुल गांधी के उन दावों के, जिसमें उन्होंने सरकार पर नाविकों की समस्याओं की अनदेखी करने का आरोप लगाया था।
थरूर के इस बयान के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इसे हाथों-हाथ लिया है। भाजपा प्रवक्ताओं का कहना है कि थरूर ने आखिरकार सच्चाई स्वीकार कर ली है और यह दर्शाता है कि कांग्रेस के भीतर नेतृत्व और नीति को लेकर कितनी गहरी दरार है। भाजपा ने इसे प्रधानमंत्री की अंतरराष्ट्रीय कूटनीति की जीत बताया और कहा कि जब बात राष्ट्रीय हितों और विदेश में फंसे भारतीयों की आती है, तो प्रधानमंत्री की सक्रियता पर संदेह करना केवल राजनीति से प्रेरित है।
ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय के लिए भी यह मुद्दा काफी संवेदनशील है। उल्लेखनीय है कि बड़ी संख्या में भारतीय मूल के लोग और छात्र अंतरराष्ट्रीय शिपिंग लाइन्स और लॉजिस्टिक्स सेक्टर में कार्यरत हैं। समुद्री सुरक्षा और नाविकों के अधिकार सीधे तौर पर उन हजारों परिवारों को प्रभावित करते हैं जिनके सदस्य हिंद-प्रशांत क्षेत्र और अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में काम करते हैं। थरूर की टिप्पणी ने इस बात पर मुहर लगाई है कि वैश्विक मंचों पर भारतीय हितों की रक्षा के लिए उच्चतम स्तर पर संवाद हो रहा है।
हालांकि, कांग्रेस के भीतर इस पर तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। पार्टी के कई नेताओं का मानना है कि ऐसे बयानों से विपक्ष की एकजुटता कमजोर होती है। राहुल गांधी पिछले काफी समय से सरकार को घेरते रहे हैं कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीयों के साथ होने वाले भेदभाव या संकट के समय केंद्र सरकार उदासीन रहती है। थरूर का बयान राहुल गांधी के उस नैरेटिव को कमजोर करता है जिसे वे आगामी चुनावों के मद्देनजर तैयार कर रहे थे।
यह पहली बार नहीं है जब शशि थरूर ने प्रधानमंत्री मोदी की प्रशंसा की है। वे पहले भी कह चुके हैं कि प्रधानमंत्री की बातों को पूरी तरह नकारने के बजाय उनके कार्यों का वस्तुनिष्ठ मूल्यांकन किया जाना चाहिए। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि थरूर का यह दृष्टिकोण उन्हें एक परिपक्व राजनेता के रूप में स्थापित करता है, लेकिन दलीय राजनीति के ढांचे में यह अक्सर विवाद का कारण बन जाता है। इस घटनाक्रम ने एक बार फिर यह बहस छेड़ दी है कि क्या विदेश नीति और नागरिक सुरक्षा जैसे संवेदनशील मुद्दों पर घरेलू राजनीति को किनारे रखा जाना चाहिए।
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