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खीर भवानी यात्रा का आगाज़: 8,500 से अधिक श्रद्धालु जम्मू से कश्मीर घाटी के लिए रवाना
ICN24 Newsroom 20 जून 2026, 07:25 pm
जम्मू से 214 बसों के काफिले में 8,500 से अधिक कश्मीरी पंडित और अन्य श्रद्धालु खीर भवानी मेले के लिए रवाना हुए, सुरक्षा के कड़े इंतजाम।
जम्मू-कश्मीर की सांस्कृतिक और धार्मिक एकता के प्रतीक 'खीर भवानी मेले' के लिए वार्षिक तीर्थयात्रा शुक्रवार को औपचारिक रूप से शुरू हो गई। जम्मू के नगरोटा इलाके से 214 बसों के एक विशाल काफिले को प्रशासनिक अधिकारियों ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस वर्ष तीर्थयात्रियों के उत्साह में भारी वृद्धि देखी जा रही है, जिसमें 8,500 से अधिक श्रद्धालु घाटी के विभिन्न मंदिरों में माथा टेकने के लिए निकले हैं।
प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार, यह पिछले कुछ वर्षों की तुलना में पंजीकरण की सबसे अधिक संख्या है। श्रद्धालुओं का यह दल मुख्य रूप से गंदेरबल जिले के तुलमुल्ला स्थित प्रसिद्ध माता खीर भवानी मंदिर जाएगा। इसके अलावा, कुलगाम के मंज़गाम, अनंतनाग के लल्लगुंड और कुपवाड़ा के टिक्कर जैसे अन्य महत्वपूर्ण मंदिरों के लिए भी भक्त रवाना हुए हैं। ज्येष्ठ अष्टमी के अवसर पर आयोजित होने वाला यह मेला कश्मीरी पंडित समुदाय के लिए अटूट आस्था का केंद्र है।
सुरक्षा और व्यवस्था की दृष्टि से इस वर्ष अभूतपूर्व प्रबंध किए गए हैं। सरकार ने पूरी यात्रा के दौरान त्रि-स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू की है। राजमार्ग पर सुरक्षा बलों की भारी तैनाती के साथ-साथ ड्रोन और सीसीटीवी कैमरों से भी निगरानी रखी जा रही है। जम्मू-कश्मीर प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि यात्रियों की सुविधा के लिए रास्ते में जलपान, चिकित्सा सहायता और ठहरने के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। शांतिपूर्ण वातावरण और बेहतर बुनियादी ढांचे ने इस बार अधिक लोगों को यात्रा में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित किया है।
ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय, विशेष रूप से सिडनी और मेलबर्न जैसे शहरों में बसे कश्मीरी प्रवासियों के लिए यह समाचार अत्यंत भावुक करने वाला है। ऑस्ट्रेलिया स्थित कश्मीरी पंडित संगठनों ने इस बड़ी संख्या में भागीदारी का स्वागत किया है। उनके अनुसार, यह यात्रा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह विस्थापित समुदाय का अपनी जड़ों से जुड़ने और कश्मीर की 'कश्मीरियत' को जीवित रखने का एक जरिया है। मेलबर्न के एक कश्मीरी प्रवासी ने बताया कि घाटी में शांति की बहाली से दूर देशों में बसे भारतीयों के मन में अपने पैतृक स्थान पर लौटने की उम्मीद जगी है।
माता खीर भवानी का मंदिर सांप्रदायिक सद्भाव का भी एक बड़ा उदाहरण पेश करता है, जहां स्थानीय मुस्लिम समुदाय पारंपरिक रूप से हिंदू श्रद्धालुओं का स्वागत करते हैं और उनके लिए पूजन सामग्री और अन्य सुविधाओं का प्रबंध करते हैं। यह मेला सदियों से कश्मीर की साझा संस्कृति का गवाह रहा है। इस वर्ष बढ़ती भीड़ इस बात का संकेत है कि घाटी में सामान्य स्थिति और विश्वास की बहाली हो रही है।
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