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व्हाइट हाउस की मंजूरी: अमेरिका में विदेशी छात्रों के रुकने की समय-सीमा अब होगी तय, खत्म हुआ 'असीमित प्रवास' का नियम
ICN24 Newsroom 20 जून 2026, 07:40 pm
व्हाइट हाउस ने विदेशी छात्रों और मीडिया प्रतिनिधियों के लिए 'अनिश्चितकालीन प्रवास' को समाप्त कर चार साल की निश्चित समय-सीमा लागू करने के नए नियम को हरी झंडी दे दी है।
वॉशिंगटन और सिडनी: भारतीय छात्रों के लिए उच्च शिक्षा के सबसे बड़े गंतव्य अमेरिका से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। व्हाइट हाउस ने होमलैंड सुरक्षा विभाग (DHS) के उस विवादित नियम को मंजूरी दे दी है, जो विदेशी छात्रों, विनिमय आगंतुकों (exchange visitors) और विदेशी मीडिया प्रतिनिधियों के लिए अमेरिका में रुकने की समय-सीमा को सीमित करता है। इस नए बदलाव के तहत, अब 'ड्यूरेशन ऑफ स्टेटस' (D/S) की व्यवस्था को समाप्त कर दिया गया है, जिसके कारण हजारों भारतीय छात्रों को अब अपनी पढ़ाई के दौरान वीजा नवीनीकरण की जटिल प्रक्रिया से गुजरना होगा।
अब तक लागू नियमों के अनुसार, अमेरिका में पढ़ने वाले विदेशी छात्र तब तक वहां रह सकते थे जब तक वे अपनी शिक्षा पूरी कर रहे हों, चाहे इसमें कितना भी समय लगे। इसे तकनीकी भाषा में 'ड्यूरेशन ऑफ स्टेटस' कहा जाता था। हालांकि, नए नियम के तहत अब छात्रों को अधिकतम चार साल की निश्चित अवधि के लिए प्रवेश दिया जाएगा। यदि उनका पाठ्यक्रम इस अवधि से अधिक समय का है, तो उन्हें अपनी कानूनी स्थिति बनाए रखने के लिए विस्तार (extension) के लिए आवेदन करना होगा। कुछ विशिष्ट श्रेणियों के लिए यह समय-सीमा केवल दो वर्ष भी हो सकती है।
अमेरिकी सरकार का तर्क है कि यह कदम राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने और वीजा अवधि से अधिक समय तक रुकने (overstay) की घटनाओं को कम करने के लिए उठाया गया है। विभाग का मानना है कि निश्चित समय-सीमा होने से छात्रों की निगरानी करना आसान होगा और सिस्टम की अखंडता बनी रहेगी। हालांकि, शिक्षा विशेषज्ञों और छात्र संगठनों ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि इससे छात्रों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा और प्रशासनिक देरी के कारण उनकी पढ़ाई में बाधा आ सकती है।
भारतीय समुदाय के लिए इसके मायने काफी गंभीर हैं। अमेरिका में अंतरराष्ट्रीय छात्रों की संख्या के मामले में भारतीय छात्र दूसरे सबसे बड़े समूह हैं। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय प्रवासियों के लिए भी यह खबर महत्वपूर्ण है, क्योंकि कई भारतीय परिवार अपने बच्चों को उच्च शिक्षा के लिए ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका दोनों देशों के विकल्पों पर विचार करते हैं। हाल ही में ऑस्ट्रेलिया ने भी अपनी आव्रजन नीति (Migration Strategy) को सख्त किया है, और अब अमेरिका के इस कदम से स्पष्ट है कि वैश्विक स्तर पर अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए नियम कड़े होते जा रहे हैं।
आलोचकों का तर्क है कि पीएचडी (PhD) और चिकित्सा अनुसंधान जैसे क्षेत्रों में शोध करने वाले छात्रों को अक्सर चार साल से अधिक का समय लगता है। ऐसे में बार-बार विस्तार के लिए आवेदन करना न केवल तनावपूर्ण है, बल्कि यह प्रतिभाशाली छात्रों को अमेरिका के बजाय अन्य देशों का रुख करने के लिए प्रेरित कर सकता है। भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय के वे लोग जिनके रिश्तेदार अमेरिका में पढ़ रहे हैं, उन्हें अब इस नए प्रशासनिक बदलाव के अनुरूप अपनी योजनाओं में बदलाव करना होगा।
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