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भारतीय सेना की बढ़ी ताकत: स्वदेशी 120mm 'गरुड़ास्त्र' मोर्टार सिस्टम का सफल परीक्षण
ICN24 Newsroom 20 जून 2026, 07:56 pm
भारत ने स्वदेशी रूप से विकसित 'गरुड़ास्त्र' का सफल परीक्षण कर रक्षा क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। यह देश का सबसे भारी व्हीकल-माउंटेड मोर्टार सिस्टम है।
भारत ने अपनी रक्षा क्षमताओं को और मजबूत करते हुए स्वदेशी रूप से विकसित 120mm 'गरुड़ास्त्र' मोर्टार सिस्टम का सफल परीक्षण किया है। यह भारत का अब तक का सबसे भारी व्हीकल-माउंटेड (वाहन पर लगा हुआ) मोर्टार सिस्टम है, जिसे भारतीय सेना की मारक क्षमता को आधुनिक बनाने के उद्देश्य से डिजाइन किया गया है। यह मील का पत्थर 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान के तहत रक्षा विनिर्माण में भारत की बढ़ती आत्मनिर्भरता को दर्शाता है।
'गरुड़ास्त्र' को विशेष रूप से दुर्गम इलाकों और ऊंचे पर्वतीय क्षेत्रों में तैनात करने के लिए तैयार किया गया है। इस सिस्टम की सबसे बड़ी विशेषता इसकी गतिशीलता (mobility) है। वाहन पर माउंट होने के कारण, इसे युद्ध क्षेत्र में तेजी से एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाया जा सकता है। यह 'शूट एंड स्कूट' तकनीक पर आधारित है, जिसका अर्थ है कि यह गोला दागने के तुरंत बाद अपनी स्थिति बदल सकता है, जिससे दुश्मन के जवाबी हमले से बचने में मदद मिलती है।
तकनीकी विशिष्टताओं की बात करें तो, यह 120mm का मोर्टार सिस्टम भारी गोलाबारी करने में सक्षम है और इसकी सटीकता अंतरराष्ट्रीय मानकों के समकक्ष है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) और नियंत्रण रेखा (LoC) जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में गरुड़ास्त्र की तैनाती भारतीय सेना को सामरिक बढ़त प्रदान करेगी। यह प्रणाली न केवल पारंपरिक युद्ध में प्रभावी है, बल्कि आतंकवाद विरोधी अभियानों में भी सटीक सहायता प्रदान कर सकती है।
इस स्वदेशी प्रणाली का विकास भारतीय निजी रक्षा उद्योग के सहयोग से किया गया है, जो वैश्विक रक्षा बाजार में भारत की उभरती छवि को पेश करता है। ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय के लिए भी यह गर्व का विषय है, क्योंकि भारत अब केवल रक्षा उपकरणों का आयातक नहीं रहा, बल्कि एक अत्याधुनिक निर्माता और निर्यातक के रूप में उभर रहा है। भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच बढ़ते रक्षा संबंधों के बीच, भारत की ऐसी तकनीकी प्रगति दोनों देशों के बीच सामरिक साझेदारी को और प्रगाढ़ करती है।
रक्षा मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, परीक्षण के दौरान गरुड़ास्त्र ने सभी निर्धारित मापदंडों को सफलतापूर्वक पूरा किया। इसके विभिन्न रेंज और अलग-अलग मौसमी परिस्थितियों में परीक्षण किए गए, जहाँ इसने अपनी विश्वसनीयता साबित की। आने वाले समय में, इस सिस्टम को औपचारिक रूप से सेना में शामिल किया जाएगा, जो पुरानी पड़ चुकी मोर्टार प्रणालियों की जगह लेगा। इस उपलब्धि से न केवल सेना का मनोबल बढ़ेगा, बल्कि विदेशी मुद्रा की भी बचत होगी जो पहले आयातित हथियारों पर खर्च की जाती थी।
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