ऑस्ट्रेलिया
कच्चे तेल की कीमतों में बढ़त: वांस की चेतावनी ने बढ़ाई ईरान शांति समझौते पर चिंता, ऑस्ट्रेलिया में बढ़ सकते हैं दाम
ICN24 Newsroom 20 जून 2026, 01:18 am

ईरान और अमेरिका के बीच संभावित शांति समझौते पर अनिश्चितता के चलते वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में इजाफा हुआ है, जिसका असर जल्द ही ऑस्ट्रेलिया में भी देखा जा सकता है।
वैश्विक तेल बाजार में एक बार फिर हलचल बढ़ गई है। ब्रेंट क्रूड की कीमतों में मामूली बढ़त दर्ज की गई है क्योंकि निवेशकों के बीच अमेरिका और ईरान के बीच होने वाले संभावित शांति समझौते को लेकर संशय गहरा गया है। हाल ही में अमेरिकी उप-राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार जे.डी. वांस द्वारा इजरायल के संदर्भ में दी गई चेतावनी ने इस कूटनीतिक प्रक्रिया को और अधिक जटिल बना दिया है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह शांति समझौता खटाई में पड़ता है, तो मध्य पूर्व में तनाव बढ़ सकता है, जिससे तेल की आपूर्ति बाधित होने का खतरा पैदा हो जाएगा।
हालांकि, एक सकारात्मक संकेत यह भी मिला है कि स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज (Strait of Hormuz) से तेल टैंकरों की आवाजाही अभी भी सुरक्षित बनी हुई है। यह जलडमरूमध्य वैश्विक तेल व्यापार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और यहां किसी भी प्रकार की सैन्य गतिविधि सीधे तौर पर कीमतों को प्रभावित करती है। वर्तमान में बाजार में उतार-चढ़ाव की स्थिति बनी हुई है, जहां एक तरफ शांति की उम्मीदें हैं और दूसरी तरफ बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव।
ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए यह खबर काफी महत्वपूर्ण है। ऑस्ट्रेलिया अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए वैश्विक कीमतों पर निर्भर है। यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल के दाम बढ़ते हैं, तो सिडनी, मेलबर्न और ब्रिस्बेन जैसे प्रमुख शहरों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में उछाल आना तय है। भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई परिवार, जो पहले से ही बढ़ती महंगाई और ब्याज दरों की मार झेल रहे हैं, उनके लिए परिवहन खर्च में बढ़ोतरी एक नई चुनौती पेश कर सकती है। विशेष रूप से उन लोगों के लिए जो रसद (Logistics), राइड-शेयरिंग या लंबी दूरी की यात्रा पर निर्भर हैं।
भारत के संदर्भ में भी इसके बड़े निहितार्थ हैं। भारत अपनी तेल जरूरतों का लगभग 80 प्रतिशत से अधिक आयात करता है। मध्य पूर्व में अस्थिरता भारतीय अर्थव्यवस्था के चालू खाता घाटे (Current Account Deficit) को प्रभावित कर सकती है। ऑस्ट्रेलिया में बसे प्रवासी भारतीय, जो अक्सर भारत में अपने व्यापारिक संबंधों या परिवार की आर्थिक स्थिति को लेकर सजग रहते हैं, उनके लिए यह वैश्विक घटनाक्रम दोहरे प्रभाव वाला है।
बाजार विश्लेषकों का कहना है कि आने वाले हफ्तों में कच्चे तेल की कीमतें वाशिंगटन और तेहरान के बीच होने वाली वार्ताओं के रुख पर निर्भर करेंगी। यदि शांति समझौते की संभावनाएं धूमिल होती हैं, तो तेल की कीमतें 90 डॉलर प्रति बैरल के पार जा सकती हैं। आईएनसी24 (ICN24) की रिपोर्ट के अनुसार, ऑस्ट्रेलिया में ईंधन की कीमतों में अगले कुछ दिनों में 5 से 10 सेंट प्रति लीटर की वृद्धि देखी जा सकती है, जिससे भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय को अपने मासिक बजट पर फिर से विचार करना पड़ सकता है।
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