ऑस्ट्रेलिया
वन नेशन की विदेश नीति पर बढ़ी चर्चा: मिसाइल शक्ति में विस्तार और संयुक्त राष्ट्र से दूरी बनाने का प्रस्ताव
ICN24 Newsroom 20 जून 2026, 08:54 pm
सर्वेक्षणों में बढ़ती लोकप्रियता के बीच पॉलीन हैनसन की वन नेशन पार्टी की विदेश नीति पर चर्चा तेज हो गई है, जिसमें रक्षा और वैश्विक संगठनों से जुड़ाव पर कड़ा रुख अपनाया गया है।
ऑस्ट्रेलियाई राजनीति में पॉलीन हैनसन की 'वन नेशन' पार्टी एक बार फिर सुर्खियों में है। हालिया ओपिनियन पोल में पार्टी की बढ़ती लोकप्रियता ने मुख्यधारा के राजनीतिक दलों और नीति विश्लेषकों का ध्यान आकर्षित किया है। जैसे-जैसे पार्टी का समर्थन आधार बढ़ रहा है, उसकी प्रस्तावित विदेश नीति पर भी गहन चर्चा शुरू हो गई है। वन नेशन का एजेंडा ऑस्ट्रेलिया की पारंपरिक कूटनीति से पूरी तरह अलग 'ऑस्ट्रेलिया फर्स्ट' (ऑस्ट्रेलिया पहले) की नीति पर आधारित है।
इस नीति का सबसे प्रमुख हिस्सा ऑस्ट्रेलिया की रक्षा क्षमताओं में भारी निवेश करना है। पार्टी का तर्क है कि वर्तमान वैश्विक अस्थिरता को देखते हुए ऑस्ट्रेलिया को अपनी सीमाओं की रक्षा के लिए लंबी दूरी की मिसाइलों और उन्नत रक्षा प्रणालियों का भंडार बढ़ाना चाहिए। वन नेशन के अनुसार, ऑस्ट्रेलिया को अपनी संप्रभुता सुनिश्चित करने के लिए केवल सहयोगियों पर निर्भर रहने के बजाय अपनी स्वतंत्र सैन्य शक्ति को मजबूत करना होगा। यह रुख हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच एक महत्वपूर्ण सैन्य विस्तार की ओर इशारा करता है।
रक्षा के साथ-साथ, वन नेशन का सबसे विवादास्पद प्रस्ताव संयुक्त राष्ट्र (UN) जैसे अंतरराष्ट्रीय संगठनों से दूरी बनाना है। पार्टी का मानना है कि वैश्विक संधियाँ और अंतरराष्ट्रीय निकाय ऑस्ट्रेलिया के आंतरिक मामलों में अनावश्यक हस्तक्षेप करते हैं। पॉलीन हैनसन लंबे समय से तर्क देती रही हैं कि ऑस्ट्रेलिया को उन संधियों से बाहर निकल जाना चाहिए जो देश के आर्थिक हितों या कानून-व्यवस्था को प्रभावित करती हैं। इसमें मानवाधिकारों से जुड़ी कुछ अंतरराष्ट्रीय शर्तें और जलवायु परिवर्तन से संबंधित समझौते शामिल हैं।
भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय के लिए यह नीतिगत बदलाव विशेष महत्व रखता है। भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच बढ़ते रणनीतिक और व्यापारिक संबंध काफी हद तक बहुपक्षीय मंचों और साझा लोकतांत्रिक मूल्यों पर आधारित हैं। यदि ऑस्ट्रेलिया अंतरराष्ट्रीय संगठनों से हाथ खींचता है, तो इसका असर क्वाड (QUAD) जैसे समूहों और द्विपक्षीय व्यापार समझौतों पर पड़ सकता है। भारतीय समुदाय, जो दोनों देशों के बीच एक मजबूत सेतु का काम करता है, के लिए ऑस्ट्रेलिया की क्षेत्रीय स्थिरता और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की प्रतिबद्धता अत्यंत आवश्यक है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि वन नेशन का यह कड़ा रुख उन मतदाताओं को लुभाने के लिए है जो बढ़ती महंगाई और वैश्विक अनिश्चितता के दौर में असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। हालांकि, आलोचकों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय संगठनों से दूरी बनाने और केवल सैन्य शक्ति पर ध्यान केंद्रित करने से ऑस्ट्रेलिया वैश्विक स्तर पर अलग-थलग पड़ सकता है। लेबर और लिबरल-नेशनल गठबंधन जैसे मुख्य दल वर्तमान में वन नेशन के इन प्रस्तावों का विरोध कर रहे हैं, लेकिन पोल में पार्टी की बढ़त यह संकेत देती है कि आने वाले समय में ऑस्ट्रेलिया की विदेश नीति पर बहस और तेज होगी।
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