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मतदान के अधिकार को 'मौलिक अधिकार' बनाने की मांग: जयराम रमेश ने दी 'राइट टू वॉक' की मिसाल

ICN24 Newsroom 20 जून 2026, 12:52 pm
मतदान के अधिकार को 'मौलिक अधिकार' बनाने की मांग: जयराम रमेश ने दी 'राइट टू वॉक' की मिसाल

कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने मतदान के अधिकार को मौलिक अधिकार घोषित करने की वकालत की है और निकोबार परियोजना पर चिंता जताई है।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री जयराम रमेश ने भारत में लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूत करने के लिए एक महत्वपूर्ण संवैधानिक बदलाव का सुझाव दिया है। उन्होंने मांग की है कि 'मतदान के अधिकार' (Right to Vote) को भारतीय संविधान के तहत एक 'मौलिक अधिकार' (Fundamental Right) का दर्जा दिया जाना चाहिए। वर्तमान में, भारत में मतदान करना एक संवैधानिक और कानूनी अधिकार है, लेकिन यह संविधान के भाग III में वर्णित मौलिक अधिकारों की श्रेणी में नहीं आता है। जयराम रमेश ने अपने इस तर्क को पुख्ता करने के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा हाल ही में 'राइट टू वॉक' (Right to Walk) यानी चलने के अधिकार पर की गई टिप्पणियों का हवाला दिया। उन्होंने तर्क दिया कि यदि बुनियादी मानवीय गतिविधियों को अधिकार के रूप में देखा जा सकता है, तो लोकतंत्र की सबसे बड़ी शक्ति—मतदान—को भी उच्चतम स्तर की कानूनी सुरक्षा मिलनी चाहिए। रमेश के अनुसार, इसे मौलिक अधिकार बनाने से चुनावी प्रक्रियाओं में नागरिकों की भागीदारी को और अधिक सुरक्षा मिलेगी और राज्य के लिए इसे बाधित करना कठिन होगा। लोकतांत्रिक सुधारों के साथ-साथ, रमेश ने अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में चल रही 'ग्रेट निकोबार द्वीप परियोजना' (Great Nicobar Island Project) को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने केंद्र सरकार पर इस परियोजना के पर्यावरणीय प्रभावों को नजरअंदाज करने और पारदर्शिता की कमी का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि 72,000 करोड़ रुपये की यह परियोजना वहां की संवेदनशील जैव विविधता और स्वदेशी जनजातियों के अस्तित्व के लिए खतरा पैदा कर सकती है। रमेश ने इस मुद्दे पर सरकार से विस्तृत स्पष्टीकरण और स्वतंत्र जांच की मांग की है। ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय (Indian-Australian Community) के लिए भारत के ये घटनाक्रम विशेष महत्व रखते हैं। प्रवासी भारतीय, जो अक्सर भारत में 'प्रॉक्सी वोटिंग' या रिमोट वोटिंग के अधिकारों की वकालत करते रहे हैं, उनके लिए मतदान के अधिकार का संवैधानिक दर्जा बदलना एक बड़ा विषय है। इसके अलावा, ऑस्ट्रेलिया जैसे देश में जहां पर्यावरण संरक्षण एक प्रमुख राजनीतिक मुद्दा है, वहां के भारतीय मूल के लोग निकोबार जैसे पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों में हो रहे विकास कार्यों को गहरी रुचि और चिंता के साथ देखते हैं। जयराम रमेश का यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारत में चुनावी सुधारों और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाने की बहस तेज हो रही है। यदि मतदान एक मौलिक अधिकार बनता है, तो यह न केवल घरेलू राजनीति बल्कि प्रवासियों के मतदान संबंधी अधिकारों की कानूनी व्याख्या को भी प्रभावित कर सकता है।
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