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हरिद्वार भूमि खरीद घोटाला: धामी सरकार की बड़ी कार्रवाई, पूर्व नगर आयुक्त को बर्खास्त करने की सिफारिश

ICN24 Newsroom 20 जून 2026, 11:38 am
हरिद्वार भूमि खरीद घोटाला: धामी सरकार की बड़ी कार्रवाई, पूर्व नगर आयुक्त को बर्खास्त करने की सिफारिश

हरिद्वार भूमि खरीद मामले में भ्रष्टाचार पर कड़ा रुख अपनाते हुए मुख्यमंत्री धामी ने पूर्व नगर आयुक्त वरुण चौधरी की बर्खास्तगी की सिफारिश की है।

उत्तराखंड की पुष्कर सिंह धामी सरकार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी 'जीरो टॉलरेंस' नीति को दोहराते हुए एक कड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है। हरिद्वार नगर निगम में हुए भूमि खरीद घोटाले के मामले में सरकार ने तत्कालीन नगर आयुक्त वरुण चौधरी को सेवा से बर्खास्त करने की सिफारिश की है। इस कार्रवाई ने राज्य के प्रशासनिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है, क्योंकि इसमें केवल एक अधिकारी नहीं बल्कि जिला स्तर के कई बड़े अधिकारियों की जवाबदेही तय की गई है। जांच रिपोर्ट के आधार पर शासन ने पाया कि हरिद्वार में कूड़ा निस्तारण प्लांट के लिए जमीन खरीद के दौरान नियमों की अनदेखी की गई और सरकारी धन का दुरुपयोग हुआ। इस मामले में तत्कालीन जिला मजिस्ट्रेट (डीएम) को भी लापरवाही का दोषी पाया गया है। साथ ही, मामले से जुड़े उप-जिलाधिकारी (एसडीएम) के खिलाफ भी दंडात्मक कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। मुख्यमंत्री धामी ने स्पष्ट किया है कि देवभूमि में भ्रष्टाचार के लिए कोई जगह नहीं है और जो भी अधिकारी जनता के पैसे का दुरुपयोग करेगा, उसे बख्शा नहीं जाएगा। यह मामला तब सामने आया जब स्थानीय स्तर पर भूमि सौदे में विसंगतियों की शिकायतें मिलीं। जांच में यह पुष्टि हुई कि जमीन की खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव था और निर्धारित मानकों का उल्लंघन किया गया था। वरुण चौधरी, जो वर्तमान में किसी अन्य विभाग में तैनात हैं, के खिलाफ विभागीय जांच के बाद शासन ने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) को उनकी बर्खास्तगी की फाइल भेजने का निर्णय लिया है। ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय, विशेषकर उत्तराखंड मूल के प्रवासियों के लिए यह खबर महत्वपूर्ण है। हरिद्वार न केवल एक धार्मिक केंद्र है बल्कि विकास परियोजनाओं के लिए एक महत्वपूर्ण क्षेत्र भी है। प्रवासी भारतीय अक्सर अपनी पैतृक भूमि में पारदर्शिता और सुशासन की मांग करते रहे हैं। धामी सरकार का यह कदम एनआरआई निवेशकों और प्रवासियों के बीच राज्य की छवि को सुधारने की दिशा में एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, इस मामले में अन्य कनिष्ठ कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। सरकार का मानना है कि इस तरह की सख्त कार्रवाई से भविष्य में सरकारी खरीद और टेंडर प्रक्रियाओं में ईमानदारी सुनिश्चित होगी। प्रशासन ने यह भी संकेत दिया है कि आने वाले दिनों में कुछ और बड़े खुलासे हो सकते हैं। हरिद्वार जैसे महत्वपूर्ण शहर में इस तरह के घोटाले का सामने आना प्रशासन की सतर्कता पर सवाल उठाता था, लेकिन वर्तमान कार्रवाई ने सरकार के इरादों को स्पष्ट कर दिया है।
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