ऑस्ट्रेलिया
'मोनोकल्चरलिज्म' क्या है? ऑस्ट्रेलिया के बहुसांस्कृतिक ढांचे पर पॉलीन हैनसन के बयान और इसके निहितार्थ
ICN24 Newsroom 20 जून 2026, 07:22 am
वन नेशन की नेता पॉलीन हैनसन ने ऑस्ट्रेलिया में बहुसंस्कृतिवाद को समाप्त कर 'मोनोकल्चरलिज्म' अपनाने की मांग की है। जानिए इसका भारतीय समुदाय पर क्या असर होगा।
ऑस्ट्रेलिया में 'बहुसंस्कृतिवाद' (Multiculturalism) दशकों से राष्ट्रीय पहचान का एक अभिन्न हिस्सा रहा है। हालांकि, हाल ही में 'वन नेशन' पार्टी की नेता और सीनेटर पॉलीन हैनसन ने एक बार फिर इस बहस को हवा दे दी है। हैनसन ने मांग की है कि ऑस्ट्रेलिया को अपनी बहुसांस्कृतिक पहचान छोड़कर 'मोनोकल्चरल' (एकल-सांस्कृतिक) राष्ट्र बनना चाहिए। भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय के लिए, जो देश के सबसे तेजी से बढ़ते प्रवासी समूहों में से एक है, यह बहस अत्यंत महत्वपूर्ण है।
'मोनोकल्चरलिज्म' या एकल-संस्कृतिवाद का सरल अर्थ एक ऐसी सामाजिक व्यवस्था है जहाँ पूरा देश एक ही साझा संस्कृति, भाषा और मूल्यों का पालन करता है। इसमें प्रवासियों से यह अपेक्षा की जाती है कि वे अपनी मूल सांस्कृतिक पहचान को पूरी तरह त्याग कर मेजबान देश की मुख्यधारा की संस्कृति में विलीन हो जाएं। यह 'एकीकरण' (Integration) के बजाय 'आत्मसात्करण' (Assimilation) पर जोर देता है। पॉलीन हैनसन का तर्क है कि बहुसंस्कृतिवाद समाज को विभाजित करता है और एक साझा ऑस्ट्रेलियाई पहचान के निर्माण में बाधा डालता है।
भारतीय समुदाय के संदर्भ में, ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले लगभग 7.5 लाख से अधिक भारतीय मूल के लोग यहाँ की अर्थव्यवस्था और सामाजिक संरचना में बड़ा योगदान देते हैं। बहुसंस्कृतिवाद के तहत, भारतीय प्रवासियों को अपनी भाषा, धर्म और त्योहारों (जैसे दिवाली और होली) को मनाने की स्वतंत्रता मिलती है, जबकि वे ऑस्ट्रेलियाई कानूनों और मूल्यों का सम्मान करते हैं। यदि ऑस्ट्रेलिया 'मोनोकल्चरलिज्म' की राह पर चलता है, तो सार्वजनिक स्थानों पर सांस्कृतिक विविधता का प्रदर्शन और अन्य भाषाओं के उपयोग पर प्रतिबंध लग सकता है, जो भारतीय समुदाय की पहचान को प्रभावित करेगा।
विश्व स्तर पर यदि देखा जाए, तो जापान और आइसलैंड जैसे देशों को अक्सर एकल-सांस्कृतिक राष्ट्रों के उदाहरण के रूप में देखा जाता है। जापान में एक बहुत ही सख्त आप्रवासन नीति है और वहां की सामाजिक व्यवस्था काफी हद तक समरूप (Homogenous) है। हालांकि, ऑस्ट्रेलिया जैसे देश के लिए इसे लागू करना चुनौतीपूर्ण है, जहाँ की लगभग 30 प्रतिशत आबादी का जन्म विदेश में हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऑस्ट्रेलिया की आर्थिक सफलता और वैश्विक पहुंच उसकी विविधता में ही निहित है।
आलोचकों का कहना है कि हैनसन की यह मांग न केवल अव्यावहारिक है, बल्कि यह उन लाखों प्रवासियों के योगदान का अपमान भी है जिन्होंने आधुनिक ऑस्ट्रेलिया के निर्माण में खून-पसीना बहाया है। 'फेडरेशन ऑफ एथनिक कम्युनिटीज काउंसिल्स ऑफ ऑस्ट्रेलिया' (FECCA) जैसे संगठनों का तर्क है कि विविधता ऑस्ट्रेलिया की कमजोरी नहीं, बल्कि उसकी सबसे बड़ी ताकत है। भारतीय समुदाय के लिए यह बहस भविष्य की उस दिशा को तय करेगी कि क्या वे अपनी जड़ों से जुड़े रहकर 'ऑस्ट्रेलियाई' कहला सकते हैं या उन्हें अपनी पहचान पूरी तरह बदलनी होगी।
संबंधित ख़बरें
ऑस्ट्रेलिया
ट्रंप का 'शांति समझौता': क्या अमेरिका को 'दुश्मन' बताने का ईरान का पुराना दांव अब खत्म होगा?
विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान दशकों से घरेलू दमन से ध्यान हटाने के लिए अमेरिका को शत्रु बताता रहा है, लेकिन ट्रंप के साथ संभावित समझौता इस नैरेटिव को बदल सकता है।
20 जून 2026, 08:40 pm
ऑस्ट्रेलिया
'पुरानी शराब, नई बोतल': डीपफेक वीडियो के बढ़ते खतरों पर कार्यकर्ताओं ने जताई चिंता
पश्चिम पापुआ के कार्यकर्ताओं को निशाना बनाने वाले एआई-जनित डीपफेक वीडियो ने 'डिजिटल उपनिवेशवाद' और भ्रामक सूचनाओं के बढ़ते खतरे पर एक नई बहस छेड़ दी है।
20 जून 2026, 08:24 pm
ऑस्ट्रेलिया
ली क्रीक: भारतीय मूल के उद्यमी का बड़ा दांव, खत्म होते 'आउटबैक' कस्बे को बचाने के लिए लगाए करोड़ों रुपये
भारतीय मूल के उद्यमी बलजीत सिंह बाजवा ने दक्षिण ऑस्ट्रेलिया के ली क्रीक में करोड़ों डॉलर का निवेश कर एक वीरान होते शहर को नई उम्मीद दी है।
20 जून 2026, 08:09 pm

