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ली क्रीक: भारतीय मूल के उद्यमी का बड़ा दांव, खत्म होते 'आउटबैक' कस्बे को बचाने के लिए लगाए करोड़ों रुपये

ICN24 Newsroom 20 जून 2026, 08:09 pm
ली क्रीक: भारतीय मूल के उद्यमी का बड़ा दांव, खत्म होते 'आउटबैक' कस्बे को बचाने के लिए लगाए करोड़ों रुपये

भारतीय मूल के उद्यमी बलजीत सिंह बाजवा ने दक्षिण ऑस्ट्रेलिया के ली क्रीक में करोड़ों डॉलर का निवेश कर एक वीरान होते शहर को नई उम्मीद दी है।

दक्षिण ऑस्ट्रेलिया के सुदूरवर्ती इलाके 'आउटबैक' में स्थित ली क्रीक (Leigh Creek) कभी कोयला खनन का एक प्रमुख केंद्र हुआ करता था। लेकिन एक दशक पहले जब यहाँ से कोयले का आखिरी ट्रक निकला, तो इस कस्बे की किस्मत पर भी ताला लटकता नजर आने लगा। वीरान होते इस शहर की तस्वीर अब बदलने वाली है, और इस बदलाव के पीछे है भारतीय मूल के एक उद्यमी बलजीत सिंह बाजवा का अटूट विश्वास और करोड़ों डॉलर का निवेश। बलजीत सिंह बाजवा ने उस समय ली क्रीक में निवेश करने का साहसिक फैसला लिया जब अन्य निवेशक और यहाँ तक कि सरकार भी इस कस्बे के भविष्य को लेकर आशंकित थी। बाजवा ने इस 'मरते हुए' टाउनशिप को बचाने के लिए अपनी जीवन भर की कमाई दांव पर लगा दी है। उनका यह कदम केवल व्यापारिक मुनाफा कमाने के लिए नहीं है, बल्कि एक क्षेत्रीय समुदाय को फिर से जीवित करने की एक बड़ी कोशिश है। 1980 के दशक में अपनी स्थापना के बाद से ली क्रीक पूरी तरह से कोयला खदान पर निर्भर था। 2015 में खदान बंद होने के बाद, यहाँ की जनसंख्या तेजी से घटने लगी और बुनियादी ढांचा चरमराने लगा। सरकारी सहायता और सेवाओं में कटौती के कारण स्थानीय लोगों के पास शहर छोड़ने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा था। ऐसे में बाजवा के निवेश ने न केवल रोजगार के नए अवसर पैदा किए हैं, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था में नई जान फूंक दी है। बाजवा ने कस्बे के रिसॉर्ट, आवास और अन्य महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचों में निवेश किया है। उनका विजन ली क्रीक को एक पर्यटन केंद्र और क्षेत्रीय सेवा केंद्र के रूप में विकसित करना है। ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय के लिए यह कहानी विशेष महत्व रखती है, क्योंकि यह प्रवासियों द्वारा ऑस्ट्रेलिया के क्षेत्रीय विकास में दिए जा रहे योगदान को रेखांकित करती है। अक्सर प्रवासी बड़े शहरों जैसे सिडनी या मेलबर्न को चुनते हैं, लेकिन बाजवा ने एक ऐसे दुर्गम इलाके को चुना जहाँ विकास की चुनौतियां अत्यधिक थीं। यह निवेश उस समय आया है जब ऑस्ट्रेलिया के कई क्षेत्रीय कस्बे जनसंख्या की कमी और आर्थिक मंदी का सामना कर रहे हैं। ली क्रीक की यह कहानी दिखाती है कि कैसे सही विजन और साहस के साथ एक खत्म होते समुदाय को फिर से खड़ा किया जा सकता है। बलजीत सिंह बाजवा का मानना है कि इस कस्बे में अपार संभावनाएं हैं और उनका निवेश आने वाले वर्षों में ली क्रीक को दक्षिण ऑस्ट्रेलिया के मानचित्र पर फिर से मजबूती से स्थापित करेगा। स्थानीय निवासियों के लिए, बाजवा केवल एक निवेशक नहीं, बल्कि एक रक्षक के रूप में उभरे हैं जिन्होंने उनके घर को उजड़ने से बचा लिया।
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