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लोकमाता देवी अहिल्याबाई होल्कर के सुशासन और न्यायप्रियता ने देश को किया गौरवान्वित: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव

ICN24 Newsroom 14 अग॰ 2026, 05:37 am
लोकमाता देवी अहिल्याबाई होल्कर के सुशासन और न्यायप्रियता ने देश को किया गौरवान्वित: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने देवी अहिल्याबाई होल्कर को सुशासन का प्रतीक बताते हुए उनके 300वें जन्म शताब्दी वर्ष पर दी श्रद्धांजलि।

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इंदौर की पूर्व शासिका लोकमाता देवी अहिल्याबाई होल्कर के योगदान को स्मरण करते हुए कहा है कि उनके सुशासन और न्यायप्रियता ने न केवल मध्य प्रदेश, बल्कि पूरे देश को गौरवान्वित किया है। भोपाल में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि देवी अहिल्याबाई मालवा की एक ऐसी महान शासिका थीं, जिनका जीवन सेवा, त्याग और न्याय के प्रति अटूट प्रतिबद्धता का उदाहरण है। डॉ. यादव ने रेखांकित किया कि देवी अहिल्याबाई का शासनकाल भारतीय इतिहास के उस स्वर्णिम अध्याय की तरह है, जहाँ एक महिला ने न केवल युद्ध कौशल का परिचय दिया, बल्कि प्रशासनिक सुधारों और जन-कल्याण के नए मानक स्थापित किए। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनके द्वारा किए गए कार्यों का प्रभाव आज भी दिखाई देता है। उनके समय में मालवा क्षेत्र ने आर्थिक और सांस्कृतिक समृद्धि के नए सोपान तय किए थे। देवी अहिल्याबाई के धार्मिक और सामाजिक योगदान पर चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने देश भर के प्रमुख तीर्थ स्थलों का जीर्णोद्धार कराया। काशी विश्वनाथ मंदिर से लेकर सोमनाथ और बद्रीनाथ तक, उनके द्वारा निर्मित घाट, मंदिर और धर्मशालाएं आज भी उनकी दूरदर्शिता और धर्म के प्रति उनकी गहरी आस्था की गवाह हैं। डॉ. यादव ने कहा कि उन्होंने सत्ता को 'राजभोग' नहीं बल्कि 'लोक-सेवा' का माध्यम माना। मुख्यमंत्री ने वर्तमान संदर्भ में उनके महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि देवी अहिल्याबाई की 300वीं जन्म शताब्दी के अवसर पर मध्य प्रदेश सरकार प्रदेश भर में विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन कर रही है। इन आयोजनों का उद्देश्य नई पीढ़ी को उनके आदर्शों से परिचित कराना है। उन्होंने कहा कि उनके जीवन से आज के शासकों और प्रशासकों को सीखने की आवश्यकता है कि कैसे पारदर्शिता और न्याय के साथ शासन चलाया जाता है। भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय के संदर्भ में, मुख्यमंत्री के इन विचारों का विशेष महत्व है। प्रवासी भारतीय, विशेष रूप से जो मध्य प्रदेश और मालवा क्षेत्र से ताल्लुक रखते हैं, देवी अहिल्याबाई को अपनी सांस्कृतिक पहचान का एक सशक्त स्तंभ मानते हैं। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के बीच उनकी गाथाएं महिला सशक्तिकरण और नेतृत्व का प्रेरणा स्रोत बनी हुई हैं। मुख्यमंत्री ने अंत में कहा कि देवी अहिल्याबाई के दिखाए मार्ग पर चलकर ही एक समृद्ध और न्यायपूर्ण समाज का निर्माण संभव है।
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