राजनीति
दिल्ली पुलिस का बड़ा खुलासा: पिछले डेढ़ साल में 30 शिशुओं की तस्करी, लाखों में बेचे गए बच्चे
ICN24 Newsroom 20 जून 2026, 07:52 am

दिल्ली पुलिस की जांच में एक अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश हुआ है जिसने आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के 30 बच्चों को 10 लाख रुपये तक की कीमत पर बेचा।
देश की राजधानी दिल्ली में मानवता को शर्मसार करने वाला एक बड़ा मामला सामने आया है। दिल्ली पुलिस द्वारा की गई एक विस्तृत जांच में बच्चों की तस्करी करने वाले एक खतरनाक अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ हुआ है। जांच के दौरान पुलिस को पता चला है कि पिछले महज डेढ़ साल के भीतर इस गिरोह ने आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लगभग 30 शिशुओं को बेचा है। इस गोरखधंधे में मुनाफे का अंतर इतना अधिक है कि इसने सुरक्षा एजेंसियों को भी सकते में डाल दिया है।
पुलिस अधिकारियों द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, यह गिरोह अत्यंत गरीब परिवारों को निशाना बनाता था। ये तस्कर मजबूर माता-पिता से उनके नवजात शिशुओं को महज 10,000 से 20,000 रुपये जैसी मामूली रकम में खरीद लेते थे। इसके बाद, इन बच्चों को देश के विभिन्न राज्यों में उन दंपत्तियों को बेचा जाता था जो संतान सुख से वंचित थे और कानूनी प्रक्रिया की जटिलताओं से बचना चाहते थे। जांच में सामने आया है कि एक-एक बच्चे का सौदा 10 लाख रुपये तक में किया गया।
यह कार्रवाई दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच द्वारा की गई एक गुप्त सूचना के आधार पर शुरू हुई थी। पुलिस का कहना है कि यह गिरोह न केवल दिल्ली, बल्कि उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान जैसे पड़ोसी राज्यों में भी सक्रिय था। गिरोह के सदस्य अस्पतालों, प्रसूति केंद्रों और झुग्गी-बस्तियों के आसपास सक्रिय रहते थे, जहां वे ऐसे परिवारों की पहचान करते थे जो आर्थिक तंगी के कारण अपने बच्चों का पालन-पोषण करने में असमर्थ थे।
जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि तस्करों का नेटवर्क बहुत व्यवस्थित था। इसमें बिचौलिए, जाली दस्तावेज बनाने वाले और कुछ छोटे क्लीनिकों के कर्मचारी भी शामिल हो सकते हैं। पुलिस अब उन परिवारों की पहचान करने की कोशिश कर रही है जिन्होंने इन बच्चों को खरीदा है। अधिकारियों का कहना है कि हालांकि कई दंपत्ति भावनात्मक कारणों से बच्चा खरीदना चाहते थे, लेकिन यह प्रक्रिया पूरी तरह से अवैध है और मानव तस्करी की श्रेणी में आती है।
ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए भी यह खबर एक चेतावनी की तरह है। अक्सर प्रवासी भारतीय (NRIs) भारत से बच्चा गोद लेने की इच्छा रखते हैं, लेकिन उन्हें हमेशा 'सेंट्रल अडॉप्शन रिसोर्स अथॉरिटी' (CARA) जैसी आधिकारिक संस्थाओं के माध्यम से ही वैध प्रक्रिया अपनानी चाहिए। अवैध तरीके से बच्चा गोद लेना न केवल भारत में बल्कि अंतरराष्ट्रीय कानूनों के तहत भी एक गंभीर अपराध है, जिससे भविष्य में नागरिकता और कानूनी पहचान से जुड़ी बड़ी समस्याएं पैदा हो सकती हैं। फिलहाल दिल्ली पुलिस इस मामले में और गिरफ्तारियां करने और बेचे गए बच्चों को बरामद करने के प्रयास में जुटी है।
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