राजनीति
ऊपरी सुबनसिरी-कमले जिला सीमा विवाद: समाधान की मांग को लेकर मंच ने सरकार से लगाई गुहार
ICN24 Newsroom 20 जून 2026, 07:23 am
ऊपरी सुबनसिरी-कमले जिला सीमा प्रभावित जन मंच ने राज्य सरकार से 2017 के पुनर्गठन अधिनियम के आधार पर सीमा विवाद सुलझाने की अपील की है।
दापोरिजो: अरुणाचल प्रदेश में प्रशासनिक सीमाओं को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। ऊपरी सुबनसिरी-कमले जिला सीमा प्रभावित जन मंच (USKDBAPF) ने राज्य सरकार से दोनों जिलों के बीच लंबे समय से चले आ रहे सीमा विवाद को तुरंत हल करने का आग्रह किया है। मंच का कहना है कि इस समाधान के लिए 'अरुणाचल प्रदेश पुनर्गठन (संशोधन) अधिनियम, 2017' के प्रावधानों का पालन किया जाना चाहिए, ताकि स्थानीय निवासियों को प्रशासनिक स्पष्टता मिल सके।
दापोरिजो में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए, मंच के अध्यक्ष दोष दासी तामिन ने स्पष्ट किया कि सीमा रेखा के निर्धारण में हो रही देरी से न केवल विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं, बल्कि स्थानीय लोगों के बीच भी भ्रम की स्थिति बनी हुई है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जिलों का निर्माण जनहित और बेहतर प्रशासन के लिए किया गया था, लेकिन स्पष्ट सीमाओं के अभाव में लोगों को बुनियादी सरकारी सेवाओं और भूमि अधिकारों से संबंधित समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
मंच ने सरकार को याद दिलाया कि 2017 का अधिनियम स्पष्ट रूप से जिलों के अधिकार क्षेत्र को परिभाषित करता है। तामिन ने आरोप लगाया कि जमीनी स्तर पर इन नियमों का कड़ाई से पालन नहीं हो रहा है, जिसके कारण दोनों जिलों के निवासियों के बीच कभी-कभी तनाव की स्थिति भी पैदा हो जाती है। मंच ने मांग की है कि एक उच्च स्तरीय समिति के माध्यम से सीमांकन की प्रक्रिया को समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाए।
ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय, विशेष रूप से पूर्वोत्तर भारत से ताल्लुक रखने वाले प्रवासियों के लिए, अपनी जड़ों से जुड़ी ऐसी खबरें शासन और विकास की दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं। सिडनी और मेलबर्न जैसे शहरों में सक्रिय अरुणाचली डायस्पोरा अक्सर अपने गृह राज्य की प्रशासनिक स्थिरता और सामुदायिक सद्भाव पर चर्चा करता है। इस तरह के सीमा विवादों का समाधान न केवल स्थानीय शांति के लिए आवश्यक है, बल्कि यह क्षेत्र में बुनियादी ढांचे के निवेश और पर्यटन की संभावनाओं को भी मजबूत करता है।
मंच ने आगे चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने इस मामले में शीघ्र हस्तक्षेप नहीं किया, तो प्रभावित क्षेत्रों के लोग लोकतांत्रिक तरीके से अपना विरोध दर्ज कराने के लिए मजबूर होंगे। उन्होंने मुख्यमंत्री कार्यालय से इस संवेदनशील मुद्दे पर संज्ञान लेने और संबंधित जिला प्रशासन को स्पष्ट निर्देश जारी करने का अनुरोध किया है। फिलहाल, क्षेत्र के निवासियों को सरकार के अगले कदम का इंतजार है, ताकि दशकों पुरानी यह अनिश्चितता समाप्त हो सके।
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