राजनीति
भेदभाव रहित समाज नागरिक स्वतंत्रता की नींव: नागरिक अधिकारों की रक्षा के लिए जागरूकता अनिवार्य
ICN24 Newsroom 20 जून 2026, 01:41 pm
बेतिया में आयोजित पीयूसीएल की संगोष्ठी में विशेषज्ञों ने कहा कि नागरिक अधिकारों की असली ताकत जागरूकता में है और भेदभाव रहित समाज ही लोकतंत्र की असली पहचान है।
बेतिया, बिहार: पीपल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज (पीयूसीएल) की जिला इकाई द्वारा हाल ही में 'नागरिक स्वतंत्रता: दिशा एवं दशा' विषय पर एक महत्वपूर्ण संगोष्ठी का आयोजन किया गया। रेड क्रॉस भवन में आयोजित इस कार्यक्रम में बुद्धिजीवियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि एक न्यायपूर्ण और भेदभाव रहित समाज ही नागरिक स्वतंत्रता की असली नींव है। यह चर्चा ऐसे समय में बेहद प्रासंगिक है जब दुनिया भर में लोकतांत्रिक मूल्यों और व्यक्तिगत अधिकारों के संरक्षण पर बहस छिड़ी हुई है।
संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए कार्यवाहक जिलाध्यक्ष विश्वनाथ झुनझुनवाला ने कहा कि भारतीय संविधान और देश का सर्वोच्च न्यायालय नागरिक स्वतंत्रता के सबसे बड़े संरक्षक हैं। हालांकि, उन्होंने इस बात पर गहरा दुख व्यक्त किया कि आज भी समाज का एक बड़ा हिस्सा अपने बुनियादी संवैधानिक अधिकारों से अनजान है। उन्होंने कहा, "जानकारी और जागरूकता के अभाव में हम अपने अधिकारों का उपयोग नहीं कर पाते। जब तक नागरिक अपने अधिकारों के प्रति सचेत नहीं होंगे, तब तक स्वतंत्रता का वास्तविक लाभ उन तक नहीं पहुंच पाएगा।"
मुख्य अतिथि जेपी सेनानी नंदलाल ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि नागरिक स्वतंत्रता और भेदभाव रहित समाज एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि समाज के हर व्यक्ति को अपने अधिकारों के लिए न केवल जागरूक होना चाहिए, बल्कि उनके हनन की स्थिति में आवाज उठाने के लिए भी तत्पर रहना चाहिए। वहीं मुख्य वक्ता और पीयूसीएल के राज्य सचिव डॉ. जगमोहन कुमार ने हाशिए पर मौजूद वर्गों की स्थिति पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि नागरिक स्वतंत्रता केवल कागजी दस्तावेजों या संविधान की किताबों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। वास्तविक स्वतंत्रता तब है जब समाज के सबसे अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति, दलितों, पिछड़ों और महिलाओं को भी विकास के समान अवसर और कानूनी सुरक्षा मिले।
इस संगोष्ठी में नागरिक कर्तव्यों पर भी चर्चा की गई। बैंक ऑफ महाराष्ट्र के शाखा प्रबंधक विकास शुक्ल और 'चाय पे चर्चा' टीम के सचिव सुनील तिवारी ने बताया कि अधिकार और कर्तव्य साथ-साथ चलते हैं। एक जागरूक नागरिक वही है जो अपने अधिकारों की मांग करने के साथ-साथ अपने सामाजिक और राष्ट्रीय दायित्वों को भी समझे। जिला सचिव डॉ. रमेश कुमार ने पीयूसीएल के गौरवशाली इतिहास और नागरिक अधिकारों की लड़ाई में इसके योगदान के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
यह विषय केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। एक प्रवासी समुदाय के रूप में, नागरिक स्वतंत्रता और भेदभाव के विरुद्ध कानूनों की समझ हमें एक नए देश में अपने अधिकारों को सुरक्षित रखने और समाज में सक्रिय भागीदारी निभाने में मदद करती है। कार्यक्रम का समापन डॉ. मदन बनिक के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। इस अवसर पर राहुल कुमार झा, ददन पासवान, इमरान कुरैशी और डॉ. श्याम चंद्र गुप्त सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
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