राजनीति
उत्तराखंड: राज्य आंदोलनकारियों के लंबित आवेदनों के निपटारे की समय सीमा बढ़ी, सीएम धामी ने दी मंजूरी
ICN24 Newsroom 5 जून 2026, 09:30 pm
उत्तराखंड सरकार ने राज्य आंदोलनकारियों के लंबित आवेदनों के निस्तारण की समय सीमा 2021 तक बढ़ा दी है, जिससे प्रवासी उत्तराखंडियों को भी लाभ मिलने की उम्मीद है।
देहरादून: उत्तराखंड की पुष्कर सिंह धामी सरकार ने राज्य निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले आंदोलनकारियों के हक में एक बड़ा निर्णय लिया है। सरकार ने राज्य आंदोलनकारियों के चिन्हीकरण और उनके लंबित आवेदनों के निस्तारण की समय सीमा को बढ़ाकर वर्ष 2021 तक कर दिया है। इस कदम का मुख्य उद्देश्य पहचान प्रक्रिया को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और समावेशी बनाना है ताकि कोई भी पात्र व्यक्ति सरकारी लाभों से वंचित न रह जाए।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की मंजूरी के बाद, सचिव शैलेश बगोली द्वारा इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी कर दिए गए हैं। गौरतलब है कि उत्तराखंड राज्य के गठन के लिए हुए संघर्ष में हजारों लोगों ने भाग लिया था, जिनमें से कई अभी भी आधिकारिक पहचान और उससे जुड़ी सुविधाओं की प्रतीक्षा कर रहे हैं। इस समय सीमा विस्तार से उन आंदोलनकारियों को बड़ी राहत मिलेगी जिनके आवेदन किन्हीं कारणों से लंबित थे या जो अब तक आवश्यक दस्तावेज जमा नहीं कर पाए थे।
ऑस्ट्रेलिया में रह रहे उत्तराखंडी मूल के प्रवासियों के लिए भी यह खबर विशेष महत्व रखती है। सिडनी, मेलबर्न और ब्रिस्बेन जैसे शहरों में बसे उत्तराखंडी समुदाय के कई सदस्यों के परिवार प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से राज्य आंदोलन से जुड़े रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया स्थित प्रवासी संगठनों ने अक्सर अपनी जड़ों से जुड़े रहने और अपने पूर्वजों के योगदान को मान्यता दिलाने की इच्छा व्यक्त की है। इस नए आदेश के बाद, प्रवासी भारतीय भी अपने परिजनों के लंबित मामलों को सुलझाने के लिए जिला प्रशासन से संपर्क कर सकेंगे।
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, राज्य सरकार राज्य आंदोलनकारियों को पेंशन, सरकारी नौकरियों में आरक्षण और अन्य सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ प्रदान करती है। आवेदनों के निस्तारण में हो रही देरी को देखते हुए कई वर्षों से समय सीमा बढ़ाने की मांग की जा रही थी। अब 2021 तक के आवेदनों पर विचार होने से जिलाधिकारियों को इन फाइलों को अंतिम रूप देने के लिए अतिरिक्त समय मिल जाएगा।
सरकार का कहना है कि यह निर्णय 'अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति' तक पहुंचने के संकल्प का हिस्सा है। आंदोलनकारियों के परिवारों ने इस फैसले का स्वागत किया है, इसे राज्य के प्रति उनके बलिदान का सम्मान बताया है। प्रशासन को निर्देशित किया गया है कि वे सत्यापन की प्रक्रिया में तेजी लाएं और यह सुनिश्चित करें कि फर्जी दावों को हटाते हुए केवल वास्तविक आंदोलनकारियों को ही सूची में शामिल किया जाए।
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