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'कट्टरता और नफरत से प्रेरित': भारत ने पाकिस्तानी राष्ट्रपति के बयानों को 'बेतुका' बताया
ICN24 Newsroom 20 जून 2026, 05:55 pm
भारत ने पाकिस्तानी राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी की हालिया टिप्पणियों को 'बेतुका' और 'कट्टरता से प्रेरित' बताते हुए सिरे से खारिज कर दिया है।
भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी द्वारा की गई हालिया टिप्पणियों पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। नई दिल्ली में आयोजित एक साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इन बयानों को 'बेतुका' और 'कट्टरता तथा नफरत' से प्रेरित बताया। भारत ने स्पष्ट किया कि इस तरह की बयानबाजी का उद्देश्य केवल अपनी आंतरिक विफलताओं से ध्यान भटकाना है।
प्रवक्ता ने कहा कि पाकिस्तान के नेतृत्व को इस तरह की निराधार टिप्पणियां करने के बजाय अपने देश के भीतर की समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए। भारत ने लगातार यह रुख अपनाया है कि पाकिस्तान के साथ किसी भी सामान्य द्विपक्षीय बातचीत के लिए आतंक और हिंसा से मुक्त वातावरण होना अनिवार्य है। हाल के दिनों में सीमा पार से हो रही घुसपैठ और आतंकी गतिविधियों में वृद्धि के बीच, राष्ट्रपति जरदारी के बयानों ने दोनों देशों के बीच तनाव को और बढ़ा दिया है।
ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय के लिए यह घटनाक्रम काफी महत्वपूर्ण है। मेलबर्न, सिडनी और पर्थ जैसे शहरों में रहने वाले दक्षिण एशियाई प्रवासी अक्सर उपमहाद्वीप के राजनीतिक स्थिरता पर नजर रखते हैं। कूटनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि जब भी पाकिस्तान आर्थिक या राजनीतिक संकट से गुजरता है, तो वहां का नेतृत्व अक्सर कश्मीर या भारत के खिलाफ बयानबाजी का सहारा लेता है। ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय-प्रवासी संगठनों ने भी समय-समय पर सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर इस तरह के नफरती भाषणों के प्रति चिंता जताई है, क्योंकि इसका असर विदेशों में रहने वाले समुदायों के आपसी सौहार्द पर भी पड़ सकता है।
विदेश मंत्रालय ने जोर देकर कहा कि पाकिस्तान को अपनी 'भारत-विरोधी' मानसिकता को त्यागना होगा। प्रवक्ता ने दोहराया कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और रहेगा। भारत की ओर से यह प्रतिक्रिया ऐसे समय में आई है जब अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान बार-बार कश्मीर का मुद्दा उठाने की कोशिश कर रहा है, जिसे दुनिया के अधिकांश देशों ने द्विपक्षीय मामला मानकर ठंडे बस्ते में डाल दिया है।
विशेषज्ञों के अनुसार, पाकिस्तानी राष्ट्रपति की यह टिप्पणी उनके घरेलू वोट बैंक को साधने की एक कोशिश हो सकती है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के लिहाज से यह बेहद गैर-जिम्मेदाराना है। भारत ने साफ कर दिया है कि वह अपनी अखंडता और सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करेगा। अब देखना यह है कि ऑस्ट्रेलिया जैसे रणनीतिक साझेदार देश इस तरह की बयानबाजी पर क्या रुख अपनाते हैं, क्योंकि भारत और ऑस्ट्रेलिया के संबंध वर्तमान में अपने सबसे मजबूत दौर में हैं।
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