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‘ये दिल मांगे मोर’: कैप्टन विक्रम बत्रा और पॉइंट 5140 की वो ऐतिहासिक जीत, जिसने बदल दिया कारगिल युद्ध का रुख

ICN24 Newsroom 20 जून 2026, 05:24 pm
‘ये दिल मांगे मोर’: कैप्टन विक्रम बत्रा और पॉइंट 5140 की वो ऐतिहासिक जीत, जिसने बदल दिया कारगिल युद्ध का रुख

20 जून 1999 को भारतीय सेना ने पॉइंट 5140 पर तिरंगा फहराया था। कैप्टन विक्रम बत्रा के 'ये दिल मांगे मोर' के नारे ने पूरे देश में जोश भर दिया था।

भारतीय सैन्य इतिहास में 20 जून का दिन अदम्य साहस और वीरता के प्रतीक के रूप में दर्ज है। आज से ठीक 25 साल पहले (1999), कारगिल युद्ध के दौरान भारतीय सेना ने द्रास सेक्टर की सबसे ऊंची और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण चोटी, पॉइंट 5140 पर दोबारा कब्जा किया था। इस मिशन की सफलता ने न केवल युद्ध की दिशा बदल दी, बल्कि दुनिया को भारतीय सैनिकों के 'कभी न हार मानने' वाले जज्बे से भी रूबरू कराया। पॉइंट 5140 तोलोलिंग रिजलाइन की सबसे ऊंची चोटी थी, जहाँ से दुश्मन श्रीनगर-लेह राष्ट्रीय राजमार्ग (NH 1D) पर सीधी नजर रख सकता था और भारतीय रसद आपूर्ति को बाधित कर रहा था। इस चोटी को मुक्त कराना भारतीय सेना के लिए अनिवार्य हो गया था। इस चुनौतीपूर्ण मिशन की जिम्मेदारी 13 जम्मू और कश्मीर राइफल्स (13 JAK RIF) को सौंपी गई थी। इस हमले की योजना दो तरफा थी, जिसका नेतृत्व कैप्टन संजीव सिंह जमवाल और कैप्टन विक्रम बत्रा कर रहे थे। मिशन की शुरुआत 20 जून 1999 को तड़के हुई। अंधेरे और खड़ी चढ़ाई का फायदा उठाते हुए, दोनों टुकड़ियों ने अलग-अलग दिशाओं से दुश्मन पर हमला बोला। भारी गोलाबारी और शून्य से नीचे के तापमान के बावजूद, भारतीय जांबाजों ने हार नहीं मानी। कैप्टन विक्रम बत्रा, जिन्हें उनके रेडियो कोड 'शेर शाह' के नाम से जाना जाता था, ने आमने-सामने की लड़ाई में दुश्मन के कई सैनिकों को ढेर कर दिया। जैसे ही चोटी पर तिरंगा लहराया, कैप्टन बत्रा ने रेडियो पर अपना प्रसिद्ध विजय संदेश भेजा: "ये दिल मांगे मोर!" कैप्टन बत्रा का यह नारा केवल एक संदेश नहीं, बल्कि भारतीय युवाओं की आकांक्षाओं और सेना के आत्मविश्वास का प्रतीक बन गया। इस जीत ने द्रास सेक्टर में पाकिस्तानी घुसपैठियों की कमर तोड़ दी और इसके बाद टाइगर हिल जैसी अन्य महत्वपूर्ण चोटियों को वापस लेने का मार्ग प्रशस्त हुआ। इस अभियान में कैप्टन संजीव सिंह जमवाल ने भी अद्भुत नेतृत्व का परिचय दिया और 'ओह ये!' के सिग्नल के साथ अपनी सफलता की पुष्टि की। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए, कारगिल विजय की ये कहानियाँ गर्व और प्रेरणा का स्रोत हैं। सिडनी और मेलबर्न जैसे शहरों में पूर्व सैनिकों और भारतीय प्रवासियों द्वारा अक्सर ऐसे शहीदों को याद किया जाता है। ICN24 से बात करते हुए, सिडनी स्थित एक सामुदायिक नेता ने कहा, "कैप्टन बत्रा जैसे नायकों की वीरता हमें अपनी जड़ों से जोड़े रखती है और हमें सिखाती है कि कर्तव्य सर्वोपरि है।" आज जब हम पॉइंट 5140 की जीत को याद करते हैं, तो यह केवल एक सैन्य उपलब्धि नहीं, बल्कि उन बलिदानों का स्मरण है जिन्होंने भारत की क्षेत्रीय अखंडता को सुरक्षित रखा। कैप्टन विक्रम बत्रा को मरणोपरांत भारत के सर्वोच्च वीरता पुरस्कार, परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया, और उनकी विरासत आज भी हर भारतीय के दिल में जीवित है।
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