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अमेरिकी संघीय अदालत का आदेश: ट्रंप प्रशासन को 39 देशों के लिए आव्रजन प्रक्रिया तुरंत शुरू करने के निर्देश
ICN24 Newsroom 13 जून 2026, 09:01 am

एक अमेरिकी संघीय न्यायाधीश ने ट्रंप प्रशासन को यात्रा प्रतिबंध से प्रभावित 39 देशों के नागरिकों के आव्रजन आवेदनों पर तुरंत कार्रवाई शुरू करने का कड़ा आदेश दिया है।
एक महत्वपूर्ण कानूनी घटनाक्रम में, संयुक्त राज्य अमेरिका के एक संघीय न्यायाधीश ने डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन को उन 39 देशों के नागरिकों के लिए आव्रजन आवेदनों (Immigration Applications) के प्रसंस्करण को तुरंत बहाल करने का आदेश दिया है, जो पूर्ववर्ती यात्रा प्रतिबंधों से प्रभावित थे। यह अदालती आदेश सरकार द्वारा पिछले निर्णयों की कथित अनदेखी के बाद आया है, जिससे हजारों आवेदकों का भविष्य अधर में लटका हुआ था।
न्यायाधीश के इस कड़े रुख ने उन मानवाधिकार समूहों और आव्रजन अधिवक्ताओं को बड़ी राहत दी है, जो लंबे समय से इस प्रशासनिक देरी के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ रहे थे। अदालत ने स्पष्ट किया है कि सरकार को एक निश्चित समय सीमा के भीतर अनुपालन सुनिश्चित करना होगा, ताकि महीनों से रुके हुए आवेदनों पर प्रगति हो सके। यह निर्णय उन परिवारों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है जो अपने प्रियजनों से मिलने या अपनी आव्रजन स्थिति को सुरक्षित करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय के लिए यह खबर महत्वपूर्ण प्रासंगिकता रखती है। यद्यपि भारत सीधे तौर पर उन 39 देशों की सूची में शामिल नहीं है जिन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया था, लेकिन अमेरिका की आव्रजन नीतियों में किसी भी प्रकार की न्यायिक सख्ती वैश्विक प्रवृत्तियों को प्रभावित करती है। ऑस्ट्रेलिया में बसे कई भारतीय परिवारों के रिश्तेदार या मित्र अमेरिका में रहते हैं या वहां प्रवास की योजना बना रहे हैं। अमेरिकी प्रशासन द्वारा आव्रजन नियमों में की जाने वाली सख्ती या ढील का सीधा असर वैश्विक गतिशीलता और अंतरराष्ट्रीय वीजा प्रक्रियाओं पर पड़ता है।
विभिन्न अधिवक्ता समूहों ने इस बात पर गहरी निराशा व्यक्त की थी कि सरकारी तंत्र ने पिछली अदालती व्याख्याओं को नजरअंदाज करते हुए फाइलों को ठंडे बस्ते में डाल दिया था। इस देरी के कारण न केवल लोगों के करियर प्रभावित हुए, बल्कि कई मानवीय संकट भी खड़े हो गए थे। अब नए आदेश के बाद, प्रशासनिक अधिकारियों को उन सभी तकनीकी बाधाओं को हटाना होगा जो इन 39 देशों के आवेदकों के मार्ग में जानबूझकर खड़ी की गई थीं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला कार्यपालिका की शक्तियों पर न्यायपालिका के नियंत्रण को दर्शाता है। यह स्पष्ट संदेश है कि आव्रजन नीतियों के क्रियान्वयन में प्रशासनिक मनमानी नहीं चलेगी। आने वाले हफ्तों में यह देखना दिलचस्प होगा कि गृह सुरक्षा विभाग (Department of Homeland Security) इस आदेश को कितनी तत्परता से लागू करता है। इस कानूनी जीत ने उन प्रवासियों में नई उम्मीद जगाई है जो वर्षों से एक अनिश्चित भविष्य का सामना कर रहे थे।
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