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कैलाश मानसरोवर यात्रा: सरकार ने नाथू ला और लिपुलेख ला चेक पोस्ट को दी आधिकारिक मंजूरी
ICN24 Newsroom 20 जून 2026, 11:52 am

भारत सरकार ने 20 जून से शुरू होने वाली कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए सिक्किम के नाथू ला और उत्तराखंड के लिपुलेख ला को अस्थायी आव्रजन चौकियों के रूप में अधिसूचित किया है।
कैलाश मानसरोवर यात्रा के इच्छुक श्रद्धालुओं के लिए एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक कदम उठाते हुए, केंद्र सरकार ने सिक्किम के नाथू ला और उत्तराखंड के लिपुलेख ला चेक पोस्ट को आधिकारिक तौर पर अधिसूचित कर दिया है। गृह मंत्रालय द्वारा जारी हालिया आदेश के अनुसार, इन दोनों रणनीतिक और धार्मिक महत्व वाले स्थानों को अस्थायी आव्रजन (इमिग्रेशन) चौकियों के रूप में स्थापित किया गया है। यह निर्णय 20 जून से शुरू होने वाली वार्षिक तीर्थयात्रा के सुचारू संचालन को सुनिश्चित करने के लिए लिया गया है।
नाथू ला और लिपुलेख ला ऐतिहासिक रूप से तिब्बत स्थित पवित्र माउंट कैलाश और मानसरोवर झील तक पहुँचने के प्राथमिक मार्ग रहे हैं। इन चौकियों को आव्रजन केंद्र के रूप में अधिकृत करने का अर्थ है कि अब यहाँ से गुजरने वाले तीर्थयात्रियों के पासपोर्ट और यात्रा दस्तावेजों का सत्यापन आधिकारिक रूप से सीमा पर ही संभव हो सकेगा। यह कदम न केवल रसद और सुरक्षा प्रबंधन को मजबूत करेगा, बल्कि दूर-दराज से आने वाले यात्रियों के लिए प्रक्रियाओं को भी सरल बनाएगा।
उत्तराखंड में स्थित लिपुलेख दर्रा पारंपरिक मार्ग है, जो अपने कठिन लेकिन आध्यात्मिक रूप से समृद्ध ट्रेक के लिए जाना जाता है। दूसरी ओर, सिक्किम का नाथू ला मार्ग उन लोगों के लिए अधिक अनुकूल माना जाता है जो सड़क मार्ग से यात्रा करना पसंद करते हैं, क्योंकि यह मार्ग मोटर योग्य सड़कों से बेहतर तरीके से जुड़ा हुआ है। सरकार की इस घोषणा से उन हजारों भक्तों में उत्साह है जो पिछले कुछ वर्षों में कोविड-19 महामारी और कूटनीतिक कारणों से यात्रा में आए व्यवधानों के बाद अब इस पवित्र स्थल के दर्शन की प्रतीक्षा कर रहे थे।
ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए भी यह खबर अत्यंत महत्वपूर्ण है। सिडनी, मेलबर्न और पर्थ जैसे शहरों में रहने वाले प्रवासी भारतीय (NRIs) और भारतीय मूल के नागरिक (OCIs) अक्सर इस यात्रा में गहरी रुचि दिखाते हैं। ऑस्ट्रेलिया के हिंदू और बौद्ध समुदायों के बीच इस तीर्थयात्रा का विशेष महत्व है, और कई लोग हर साल विदेश मंत्रालय (MEA) के माध्यम से पंजीकरण कराते हैं। भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय के लिए, भारत में आव्रजन प्रक्रियाओं का स्पष्ट और सुव्यवस्थित होना यात्रा नियोजन को आसान बनाता है।
प्रशासनिक स्तर पर, इन चेक पोस्टों पर बुनियादी ढांचे को उन्नत किया जा रहा है ताकि तीर्थयात्रियों की संख्या को संभाला जा सके। सुरक्षा एजेंसियों और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) को इन क्षेत्रों में मुस्तैद रहने और स्वास्थ्य सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। यात्रा के दौरान यात्रियों को अत्यधिक ऊंचाई और कठिन मौसम का सामना करना पड़ता है, जिसके लिए सरकार ने कड़े स्वास्थ्य प्रोटोकॉल भी निर्धारित किए हैं। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि केवल वही श्रद्धालु इन मार्गों का उपयोग कर सकेंगे जिनके पास वैध परमिट और स्वास्थ्य प्रमाणपत्र होगा।
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