राजनीति
ट्रंप प्रशासन ने 'सेंचुरी नीतियों' पर मैरीलैंड के खिलाफ कानूनी मोर्चा खोला; प्रवासी समुदायों पर पड़ेगा असर
ICN24 Newsroom 11 जुल॰ 2026, 01:31 pm

ट्रंप प्रशासन के न्याय विभाग ने मैरीलैंड राज्य की उन नीतियों को चुनौती दी है जो स्थानीय पुलिस को संघीय प्रवासन अधिकारियों के साथ सहयोग करने से रोकती हैं।
संयुक्त राज्य अमेरिका के न्याय विभाग (DOJ) ने मैरीलैंड राज्य के खिलाफ एक महत्वपूर्ण कानूनी कार्रवाई शुरू की है। यह मुकदमा मैरीलैंड की उन 'सेंचुरी नीतियों' (Sanctuary Policies) को लक्षित करता है, जो स्थानीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों को संघीय प्रवासन अधिकारियों, विशेष रूप से इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट (ICE) के साथ सहयोग करने से रोकती हैं। ट्रंप प्रशासन का तर्क है कि ये नीतियां संघीय कानून का उल्लंघन करती हैं और सार्वजनिक सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करती हैं।
मैरीलैंड, जो लंबे समय से डेमोक्रेटिक पार्टी का गढ़ रहा है, ने ऐसे कानून लागू किए हैं जो स्थानीय पुलिस को किसी व्यक्ति की प्रवासन स्थिति के बारे में पूछने या उन्हें केवल नागरिक प्रवासन उल्लंघन के आधार पर हिरासत में रखने से मना करते हैं। न्याय विभाग के अनुसार, यह 'असहयोग' की स्थिति उन अपराधियों को रिहा करने का कारण बनती है जिन्हें वापस उनके देश भेजा जाना चाहिए था। वाशिंगटन डीसी के पास स्थित होने के कारण मैरीलैंड का यह रुख राजनीतिक और कानूनी रूप से अत्यंत संवेदनशील हो गया है।
इस कानूनी लड़ाई का केंद्र अमेरिकी संविधान का 'सुप्रिमेसी क्लॉज' (Supremacy Clause) है, जो यह निर्धारित करता है कि संघीय कानून राज्य के कानूनों पर भारी पड़ेंगे। मैरीलैंड के अधिकारियों का तर्क है कि उनके कानून स्थानीय समुदायों में विश्वास बनाने के लिए आवश्यक हैं, ताकि प्रवासी बिना किसी डर के अपराधों की रिपोर्ट कर सकें। हालांकि, न्याय विभाग का कहना है कि राज्य सरकारें संघीय सरकार के प्रवासन नियंत्रण के संवैधानिक अधिकार में बाधा नहीं डाल सकतीं।
भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय के लिए यह घटनाक्रम काफी प्रासंगिक है। हालांकि ऑस्ट्रेलिया में संयुक्त राज्य अमेरिका की तरह 'सेंचुरी स्टेट्स' की अवधारणा नहीं है, लेकिन प्रवासन प्रवर्तन और स्थानीय अधिकारों के बीच संतुलन वहां भी एक चर्चा का विषय रहता है। ऑस्ट्रेलिया में प्रवासन कानून पूरी तरह से संघीय स्तर (Migration Act 1958) पर नियंत्रित होते हैं, और राज्यों के पास प्रवासन नीतियों को बाधित करने की सीमित शक्ति होती है। मैरीलैंड में हो रही यह कानूनी लड़ाई दिखाती है कि कैसे प्रवासन नीतियां किसी देश के आंतरिक राजनीतिक ढांचे और संघीय संबंधों को तनावपूर्ण बना सकती हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह मुकदमा ट्रंप प्रशासन के पक्ष में जाता है, तो इसका असर कैलिफोर्निया और न्यूयॉर्क जैसे अन्य 'सेंचुरी राज्यों' पर भी पड़ेगा। भारतीय प्रवासियों के लिए, जो अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया दोनों देशों में एक बड़ी आबादी का हिस्सा हैं, इस तरह के कानूनी बदलाव वीजा सुरक्षा और निवास संबंधी नियमों को प्रभावित कर सकते हैं। कानूनी प्रवासियों के बीच अक्सर यह चिंता रहती है कि ऐसी नीतियों के कारण प्रवासन प्रणाली में अनिश्चितता पैदा होती है।
फिलहाल, मैरीलैंड के अटॉर्नी जनरल ने इन दावों को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया है और अदालत में डटने का संकल्प लिया है। आने वाले महीनों में यह मामला अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय तक भी जा सकता है, जो आने वाले दशकों के लिए अमेरिका में प्रवासन और संघीय शक्तियों की सीमा तय करेगा।
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