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भारत और इंडोनेशिया मनाएंगे ‘टैगोर-देवतारा सांस्कृतिक और शैक्षिक कूटनीति वर्ष’, ऐतिहासिक संबंधों को मिलेगी नई ऊंचाई
ICN24 Newsroom 11 जुल॰ 2026, 05:32 am

भारत और इंडोनेशिया ने साझा विरासत को सम्मान देने के लिए ‘टैगोर-देवतारा सांस्कृतिक और शैक्षिक कूटनीति वर्ष’ की घोषणा की है, जिससे द्विपक्षीय संबंधों में नया अध्याय जुड़ेगा।
भारत और इंडोनेशिया ने अपने सदियों पुराने सभ्यतागत और सांस्कृतिक संबंधों को एक नई दिशा देने के लिए ‘टैगोर-देवतारा सांस्कृतिक और शैक्षिक कूटनीति वर्ष’ मनाने का निर्णय लिया है। यह पहल नोबेल पुरस्कार विजेता रवींद्रनाथ टैगोर और इंडोनेशिया के प्रसिद्ध शिक्षाविद् की हजर देवतारा के बीच वैचारिक और शैक्षिक समानता को समर्पित है। इस घोषणा का उद्देश्य न केवल दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक कड़ियों को याद करना है, बल्कि आधुनिक युग में शैक्षिक और कलात्मक सहयोग के नए द्वार खोलना भी है।
इस कूटनीतिक वर्ष की पृष्ठभूमि में गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की 1927 की ऐतिहासिक इंडोनेशिया यात्रा शामिल है। उस समय टैगोर ने जावा और बाली के द्वीपों का भ्रमण किया था, जहाँ उन्होंने भारतीय और इंडोनेशियाई संस्कृतियों के गहरे मिलन को महसूस किया था। टैगोर के शिक्षा के प्रति वैश्विक दृष्टिकोण और शांतिनिकेतन की उनकी परिकल्पना ने इंडोनेशिया के राष्ट्रीय नायक और शिक्षा के जनक माने जाने वाले की हजर देवतारा को काफी प्रभावित किया था। देवतारा ने इंडोनेशिया में 'तामनशिस्वा' (Tamansiswa) शिक्षा आंदोलन की शुरुआत की थी, जिसमें टैगोर के शैक्षिक सिद्धांतों की झलक मिलती है।
सांस्कृतिक और शैक्षिक कूटनीति के इस वर्ष के दौरान, दोनों देश कई संयुक्त कार्यक्रमों का आयोजन करेंगे। इसमें छात्र विनिमय कार्यक्रम (Student Exchange), संयुक्त अनुसंधान परियोजनाएं, कला प्रदर्शनियां और साहित्यिक संगोष्ठियां शामिल हैं। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, इन कार्यक्रमों का मुख्य केंद्र युवाओं को अपनी साझा विरासत से परिचित कराना और भविष्य की चुनौतियों के लिए शैक्षिक साझेदारी को मजबूत करना होगा। यह पहल भारत की 'एक्ट ईस्ट' नीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जा रही है, जो दक्षिण-पूर्व एशिया के साथ संबंधों को केवल व्यापार तक सीमित न रखकर सांस्कृतिक स्तर पर भी जोड़ती है।
ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय के लिए भी यह घटनाक्रम विशेष महत्व रखता है। ऑस्ट्रेलिया स्वयं हिंद-प्रशांत (Indo-Pacific) क्षेत्र का एक प्रमुख खिलाड़ी है और यहां का प्रवासी भारतीय समुदाय इंडोनेशिया और भारत के बीच बढ़ते सांस्कृतिक सामंजस्य को क्षेत्रीय स्थिरता और बहुसंस्कृतिवाद के रूप में देखता है। सिडनी और मेलबर्न जैसे शहरों में सक्रिय भारतीय संगठन अक्सर दक्षिण-पूर्व एशियाई समुदायों के साथ मिलकर सांस्कृतिक उत्सव मनाते हैं, ऐसे में भारत और इंडोनेशिया के बीच यह आधिकारिक जुड़ाव प्रवासी भारतीयों के लिए 'सॉफ्ट पावर' के नए अवसर पैदा करेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि 'टैगोर-देवतारा वर्ष' केवल एक प्रतीकात्मक उत्सव नहीं है, बल्कि यह हिंद महासागर के दो प्रमुख देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को सांस्कृतिक आधार प्रदान करने का एक प्रयास है। जैसे-जैसे वैश्विक राजनीति में हिंद-प्रशांत क्षेत्र का महत्व बढ़ रहा है, भारत और इंडोनेशिया का यह सांस्कृतिक सेतु क्षेत्र में शांति और सहयोग का एक उदाहरण पेश कर सकता है। आगामी महीनों में जकार्ता और नई दिल्ली के बीच उच्च स्तरीय यात्राओं और बड़े पैमाने पर सांस्कृतिक आयोजनों की उम्मीद है, जो इस कूटनीति वर्ष को यादगार बनाएंगे।
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