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जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के लिए अनुमति का इंतज़ार, उमर अब्दुल्ला ने लगाया केंद्र पर बाधा डालने का आरोप

ICN24 Newsroom 11 जुल॰ 2026, 11:31 am
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के लिए अनुमति का इंतज़ार, उमर अब्दुल्ला ने लगाया केंद्र पर बाधा डालने का आरोप

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने आरोप लगाया है कि 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर होने वाले राज्य के दर्जे की बहाली के विरोध प्रदर्शन को रोकने की कोशिश की जा रही है।

श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने शुक्रवार को केंद्र सरकार और दिल्ली प्रशासन पर नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन में अड़ंगे डालने का आरोप लगाया है। मुख्यमंत्री के अनुसार, उनकी पार्टी ने 20 जुलाई को दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक विशाल धरने के लिए अनुमति मांगी है, लेकिन कई दिन बीत जाने के बाद भी अभी तक कोई जवाब नहीं मिला है। यह प्रदर्शन जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा वापस दिलाने की मांग को लेकर आयोजित किया जा रहा है। श्रीनगर में एक कार्यक्रम के इतर पत्रकारों से बात करते हुए मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि उनकी पार्टी पिछले चार-पांच दिनों से अनुमति मिलने का इंतजार कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ 'तत्व' जानबूझकर नेशनल कॉन्फ्रेंस के इस अभियान को विफल करने की कोशिश कर रहे हैं। अब्दुल्ला ने बिना किसी का नाम लिए कहा, "कुछ लोग हमारे कार्यक्रम को पटरी से उतारने में लगे हैं। उन्होंने अपनी तारीखें बदल ली हैं ताकि वे हमारे कार्यक्रम के साथ टकरा सकें और हमें अनुमति न मिल सके।" उमर अब्दुल्ला ने भेदभाव का मुद्दा उठाते हुए कहा कि जबकि अन्य संगठनों को महज 24 घंटों के भीतर प्रदर्शन की अनुमति मिल जाती है, राज्य की सत्ताधारी पार्टी को जानबूझकर अधर में लटकाया जा रहा है। 20 जुलाई की तारीख इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसी दिन संसद का मानसून सत्र शुरू होने वाला है। नेशनल कॉन्फ्रेंस इस अवसर का लाभ उठाकर राष्ट्रीय स्तर पर जम्मू-कश्मीर के संवैधानिक अधिकारों की गूंज पहुंचाना चाहती है। इस राजनीतिक गोलबंदी को व्यापक बनाने के लिए नेशनल कॉन्फ्रेंस ने देश भर के 52 प्रमुख राजनीतिक और धार्मिक नेताओं को आमंत्रित किया है। आमंत्रित नेताओं की सूची में सोनिया गांधी, राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे, ममता बनर्जी, एमके स्टालिन, अखिलेश यादव और अरविंद केजरीवाल जैसे दिग्गज शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि यह केवल एक राजनीतिक दल का मुद्दा नहीं है, बल्कि जम्मू-कश्मीर के लोगों के लोकतांत्रिक अधिकारों और सम्मान की बहाली का सवाल है। ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय, विशेष रूप से कश्मीरी प्रवासियों के लिए, घाटी की राजनीतिक स्थिरता हमेशा से चिंता का विषय रही है। कैनबरा और सिडनी जैसे शहरों में रहने वाले प्रवासी भारतीय अक्सर जम्मू-कश्मीर में लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं की बहाली और शांतिपूर्ण शासन की वकालत करते रहे हैं। इस प्रस्तावित प्रदर्शन पर भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय की भी पैनी नजर है, क्योंकि यह केंद्र के साथ राज्य के भविष्य के संबंधों की दिशा तय कर सकता है। गौरतलब है कि अगस्त 2019 में अनुच्छेद 370 के हटने के बाद जम्मू-कश्मीर को केंद्र शासित प्रदेश बना दिया गया था। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट और सार्वजनिक मंचों पर बार-बार यह दोहराया है कि 'उचित समय' पर राज्य का दर्जा बहाल कर दिया जाएगा। हालांकि, नेशनल कॉन्फ्रेंस का तर्क है कि अब जब लोकतांत्रिक चुनाव संपन्न हो चुके हैं, तो राज्य का दर्जा लौटाने में देरी का कोई औचित्य नहीं रह जाता है।
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