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सत्य हिंदी बुलेटिन: ईरान पर ट्रंप की धमकी और पीएम मोदी की चुप्पी पर सियासी घमासान, सोनम वांगचुक का आंदोलन जारी

ICN24 Newsroom 6 जुल॰ 2026, 02:31 am
सत्य हिंदी बुलेटिन: ईरान पर ट्रंप की धमकी और पीएम मोदी की चुप्पी पर सियासी घमासान, सोनम वांगचुक का आंदोलन जारी

विपक्ष ने डोनाल्ड ट्रंप की ईरान को दी गई धमकी पर प्रधानमंत्री की चुप्पी को घेरा, वहीं लद्दाख की स्वायत्तता के लिए सोनम वांगचुक का अनशन जारी है।

भारत की राजनीति और वैश्विक कूटनीति के लिहाज से आज का दिन काफी गहमागहमी भरा रहा। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और प्रवक्ता पवन खेड़ा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोला है। खेड़ा ने पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान को दी गई हालिया धमकी का जिक्र करते हुए पूछा कि प्रधानमंत्री इस गंभीर विषय पर मौन क्यों हैं? उन्होंने आरोप लगाया कि एक ओर सरकार 'विश्वगुरु' होने का दावा करती है, वहीं दूसरी ओर महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर भारत की प्रतिक्रिया नगण्य रहती है। यह मुद्दा विशेष रूप से भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय के लिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि मध्य पूर्व की स्थिरता का सीधा असर वैश्विक ईंधन कीमतों और प्रवासियों की सुरक्षा पर पड़ता है। पवन खेड़ा ने अपने संबोधन में कहा कि डोनाल्ड ट्रंप ने खुले तौर पर ईरान को नष्ट करने की बात कही है, जो वैश्विक शांति के लिए खतरा है। उन्होंने तर्क दिया कि भारत के ईरान के साथ पुराने रणनीतिक और व्यापारिक संबंध रहे हैं, विशेषकर चाबहार बंदरगाह को लेकर। ऐसे में भारत की चुप्पी न केवल हमारी विदेश नीति की कमजोरी को दर्शाती है, बल्कि क्षेत्र में हमारे हितों को भी प्रभावित कर सकती है। विपक्षी दलों का कहना है कि प्रधानमंत्री को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की स्वतंत्र आवाज को और मुखरता से रखना चाहिए। दूसरी ओर, लद्दाख में जलवायु कार्यकर्ता और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक का भूख हड़ताल आंदोलन एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। वांगचुक लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची के तहत लाने और राज्य का दर्जा देने की मांग कर रहे हैं। उनका तर्क है कि हिमालयी क्षेत्र की नाजुक पारिस्थितिकी को औद्योगिक शोषण से बचाने के लिए स्थानीय शासन और संवैधानिक सुरक्षा अनिवार्य है। दिल्ली की सीमाओं पर उनके विरोध प्रदर्शन को देशभर से समर्थन मिल रहा है। वांगचुक का कहना है कि यह केवल लद्दाख की लड़ाई नहीं है, बल्कि यह भविष्य की पीढ़ियों के लिए पर्यावरण बचाने का संघर्ष है। ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय के लिए ये दोनों खबरें विशेष महत्व रखती हैं। एक तरफ जहां विदेश नीति में भारत का रुख प्रवासी भारतीयों की प्रतिष्ठा से जुड़ा होता है, वहीं दूसरी ओर लद्दाख जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में पर्यावरण संरक्षण की मांग जलवायु परिवर्तन के वैश्विक विमर्श का हिस्सा है। सिडनी और मेलबर्न में सक्रिय भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समूहों ने भी समय-समय पर हिमालयी क्षेत्र के संरक्षण के प्रति चिंता व्यक्त की है। आज की अन्य प्रमुख खबरों में संसद के भीतर आर्थिक नीतियों पर चर्चा और राज्यों के बीच संसाधन बंटवारे का मुद्दा भी छाया रहा। हालांकि, पवन खेड़ा का हमला और वांगचुक का संकल्प आज के समाचार बुलेटिन की सबसे बड़ी सुर्खियां बनी रहीं। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में विदेश नीति पर सरकार को अपनी स्थिति और स्पष्ट करनी पड़ सकती है, जबकि लद्दाख का मुद्दा अब एक बड़े नागरिक आंदोलन का रूप ले चुका है।
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