राजनीति
PoJK में पाकिस्तान के खिलाफ बढ़ता जनाक्रोश: 27वें दिन भी सड़कों पर उतरे हजारों लोग, बुनियादी सुविधाओं की मांग
ICN24 Newsroom 6 जुल॰ 2026, 03:31 am

पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoJK) में 27 दिनों से विरोध प्रदर्शन जारी हैं। बिजली की बढ़ी कीमतों और आटे की कमी को लेकर जनता में भारी रोष है।
पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoJK) में स्थानीय प्रशासन और पाकिस्तान सरकार के खिलाफ जारी विरोध प्रदर्शन अब एक बड़े जन आंदोलन का रूप ले चुके हैं। इस आंदोलन के 27वें दिन भी मुजफ्फराबाद, रावलकोट और मीरपुर जैसे प्रमुख शहरों में हजारों की संख्या में लोग सड़कों पर उतरे। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पाकिस्तान सरकार इस क्षेत्र का शोषण कर रही है और उन्हें बुनियादी मानवीय अधिकारों से भी वंचित रखा जा रहा है।
इस व्यापक आंदोलन का नेतृत्व मुख्य रूप से 'ज्वाइंट अवामी एक्शन कमेटी' (JAAC) द्वारा किया जा रहा है। प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगों में बिजली के बिलों में कटौती, गेहूं के आटे पर सब्सिडी की बहाली और क्षेत्र के प्राकृतिक संसाधनों पर स्थानीय नियंत्रण शामिल है। पिछले कुछ हफ्तों में, इन प्रदर्शनों ने उग्र रूप ले लिया है, जिससे कई स्थानों पर स्थानीय पुलिस और सुरक्षा बलों के साथ झड़पें भी हुई हैं। आंदोलन में महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों की भागीदारी यह दर्शाती है कि समाज का हर वर्ग मौजूदा व्यवस्था से असंतुष्ट है।
आर्थिक संकट से जूझ रहे पाकिस्तान में महंगाई ने आम जनता की कमर तोड़ दी है। PoJK के निवासियों का कहना है कि वे नीलम-झेलम जलविद्युत परियोजना के माध्यम से पाकिस्तान को सस्ती बिजली प्रदान करते हैं, लेकिन उन्हें खुद अत्यधिक दरों पर बिजली खरीदने के लिए मजबूर किया जा रहा है। इसके अलावा, सरकारी नौकरियों में भेदभाव और विकास कार्यों की कमी ने भी लोगों के गुस्से को भड़काने का काम किया है। स्थानीय नेताओं का कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, यह विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा।
ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय, विशेष रूप से वे जो जम्मू और कश्मीर से संबंध रखते हैं, इस घटनाक्रम पर करीबी नजर बनाए हुए हैं। सिडनी और मेलबर्न में रहने वाले प्रवासी भारतीयों के बीच सोशल मीडिया पर इन विरोध प्रदर्शनों की व्यापक चर्चा हो रही है। ऑस्ट्रेलिया में मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का मानना है कि PoJK में स्थिति चिंताजनक है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को वहां हो रहे मानवाधिकारों के उल्लंघन पर ध्यान देना चाहिए। भारत सरकार ने भी अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बार-बार यह स्पष्ट किया है कि पूरा जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और PoJK में जनता के साथ हो रहा व्यवहार वैश्विक चिंता का विषय है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पाकिस्तान सरकार ने जल्द ही इन मांगों का समाधान नहीं किया, तो यह आंदोलन सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा बन सकता है। वर्तमान में, क्षेत्र के कई हिस्सों में इंटरनेट सेवाएं बाधित हैं और भारी सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं। इसके बावजूद, जनता का हौसला कम नहीं हुआ है और 'आजादी' व 'हक' के नारों के साथ विरोध प्रदर्शनों का सिलसिला जारी है।
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