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हरिद्वार: मां मनसा देवी मंदिर में पुजारियों के लिए नया नियम, अब बिना जेब वाले कुर्ते में होगी सेवा
ICN24 Newsroom 7 जुल॰ 2026, 04:31 am
हरिद्वार के प्रसिद्ध मां मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट ने दान और चढ़ावे में पारदर्शिता लाने के लिए पुजारियों के लिए बिना जेब वाले कुर्ते पहनना अनिवार्य कर दिया है।
उत्तराखंड के हरिद्वार में स्थित प्रसिद्ध सिद्धपीठ मां मनसा देवी मंदिर के प्रबंधन ने मंदिर की व्यवस्थाओं और दान-दक्षिणा की प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए एक अभूतपूर्व निर्णय लिया है। मंदिर ट्रस्ट ने आदेश जारी किया है कि अब मंदिर परिसर में ड्यूटी पर तैनात रहने वाले सभी पुजारी केवल बिना जेब वाले कुर्ते पहनकर ही अपनी सेवाएं देंगे। यह कदम मंदिर में आने वाले करोड़ों रुपयों के चढ़ावे और श्रद्धालुओं द्वारा अर्पित किए जाने वाले आभूषणों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है।
मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारियों के अनुसार, पिछले कुछ समय से ऐसी शिकायतें और आशंकाएं व्यक्त की जा रही थीं कि दान-पात्र में डालने के बजाय कुछ राशि या कीमती सामान व्यक्तिगत रूप से रख लिया जाता है। हालांकि पुजारियों की निष्ठा पर सीधे सवाल नहीं उठाए गए हैं, लेकिन व्यवस्था को और अधिक विश्वसनीय बनाने के लिए 'पॉकेटलेस' पहनावे को जरूरी समझा गया। ट्रस्ट का मानना है कि इस नियम के लागू होने से न केवल चोरी की गुंजाइश खत्म होगी, बल्कि श्रद्धालुओं के मन में भी मंदिर प्रबंधन के प्रति विश्वास और सुदृढ़ होगा।
मां मनसा देवी मंदिर हरिद्वार के सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों में से एक है, जहाँ साल भर दुनिया भर से लाखों श्रद्धालु पहुँचते हैं। इनमें ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और अमेरिका जैसे देशों में रहने वाले अनिवासी भारतीय (NRI) भी बड़ी संख्या में शामिल होते हैं, जो मंदिर के विकास के लिए भारी मात्रा में दान देते हैं। ऐसे में दान की एक-एक पाई का सही हिसाब रखना ट्रस्ट की प्राथमिकता बन गई है। नए नियमों के तहत अब पुजारियों को मंदिर परिसर में प्रवेश करते समय और बाहर निकलते समय विशेष निगरानी से भी गुजरना पड़ सकता है।
इस फैसले पर मंदिर से जुड़े पुजारियों की प्रतिक्रिया मिली-जुली रही है, लेकिन अधिकांश ने इसे मंदिर की गरिमा और व्यवस्था सुधारने के हित में स्वीकार किया है। ट्रस्ट का कहना है कि सीसीटीवी कैमरों की निगरानी के साथ-साथ पहनावे में यह बदलाव एक अतिरिक्त सुरक्षा कवच की तरह काम करेगा। यह निर्णय भारत के अन्य प्रमुख मंदिरों के लिए भी एक मिसाल पेश कर सकता है, जहाँ अक्सर दान प्रबंधन को लेकर विवाद सामने आते रहते हैं। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए भी यह खबर महत्वपूर्ण है, क्योंकि वे अक्सर अपनी भारत यात्रा के दौरान हरिद्वार को अपनी आध्यात्मिक यात्रा का मुख्य केंद्र बनाते हैं।
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