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डीयू एडमिशन 2026: कॉलेजों ने शुरू किए काउंसलिंग सत्र, छात्रों को 'प्रेफरेंस लिस्ट' तैयार करने में मिलेगी मदद
ICN24 Newsroom 7 जुल॰ 2026, 01:31 am

दिल्ली विश्वविद्यालय के कॉलेजों ने स्नातक प्रवेश के लिए काउंसलिंग सत्र शुरू किए हैं, ताकि छात्र सीएसएएस पोर्टल पर सही वरीयता सूची भर सकें।
दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) में स्नातक स्तर पर प्रवेश की प्रक्रिया अब अपने सबसे महत्वपूर्ण चरण में पहुंच गई है। शैक्षणिक सत्र 2026 के लिए विभिन्न कॉलेजों ने विशेष काउंसलिंग सत्र और हेल्प-डेस्क की शुरुआत की है। इन सत्रों का मुख्य उद्देश्य छात्रों को 'कॉमन सीट एलोकेशन सिस्टम' (CSAS) के तहत कॉलेज और पाठ्यक्रमों की वरीयता सूची (Preference List) तैयार करने में तकनीकी और शैक्षणिक मार्गदर्शन प्रदान करना है।
विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, प्रवेश प्रक्रिया के दूसरे चरण में छात्रों को अपने पसंदीदा कॉलेजों और पाठ्यक्रमों का चयन करना होता है। अक्सर यह देखा गया है कि छात्र इस प्रक्रिया में गलती कर देते हैं, जिससे बेहतर अंक होने के बावजूद उन्हें मनपसंद कॉलेज नहीं मिल पाता। इसी समस्या को देखते हुए हंसराज, हिंदू, मिरांडा हाउस और रामजस जैसे प्रमुख कॉलेजों ने स्वयंसेवक और प्रवेश समिति के सदस्यों को तैनात किया है जो छात्रों की शंकाओं का समाधान कर रहे हैं।
विशेष रूप से प्रवासी भारतीय (NRI) और ओवरसीज सिटीजन्स ऑफ इंडिया (OCI) श्रेणी के छात्रों के लिए भी यह जानकारी अत्यंत महत्वपूर्ण है। ऑस्ट्रेलिया में रह रहे कई भारतीय परिवार अपने बच्चों के उच्च शिक्षा के लिए भारत के प्रतिष्ठित संस्थानों की ओर देखते हैं। डीयू के इन हेल्प-डेस्क के माध्यम से दूर-दराज या विदेशों में बैठे छात्र भी ऑनलाइन माध्यम से जानकारी प्राप्त कर सकते हैं कि वे अपने स्कोर के आधार पर किन कॉलेजों को प्राथमिकता दें।
काउंसलिंग सत्रों के दौरान छात्रों को यह समझाया जा रहा है कि केवल कॉलेज की रैंकिंग ही नहीं, बल्कि पाठ्यक्रम की प्रासंगिकता और पिछले वर्षों के कट-ऑफ रुझान को भी ध्यान में रखना चाहिए। विशेषज्ञों का कहना है कि छात्रों को सलाह दी जाती है कि वे अधिक से अधिक 'कॉम्बिनेशन' चुनें ताकि उनके प्रवेश की संभावना बढ़ सके। यदि कोई छात्र कम विकल्पों का चयन करता है, तो उसे सीट आवंटन से बाहर होने का खतरा रहता है।
इसके अलावा, तकनीकी सहायता के लिए कॉलेजों ने ईमेल और हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए हैं। यह कदम विशेष रूप से उन छात्रों के लिए सहायक है जो दिल्ली से बाहर रहते हैं या पहली बार डिजिटल प्रवेश प्रणाली का उपयोग कर रहे हैं। विश्वविद्यालय ने स्पष्ट किया है कि एक बार वरीयता सूची लॉक होने के बाद उसमें बदलाव करना संभव नहीं होगा, इसलिए छात्रों को बहुत सावधानी बरतने की आवश्यकता है।
आगामी हफ्तों में, डीयू द्वारा वेबिनार की एक श्रृंखला आयोजित करने की भी योजना है, जिसमें प्रवेश अधिकारी छात्रों के सीधे सवालों के जवाब देंगे। ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय के लिए, जो अपने परिजनों को इस प्रक्रिया में सहयोग कर रहे हैं, ये आधिकारिक सत्र और कॉलेजों की पहल एक विश्वसनीय संसाधन के रूप में उभरी है।
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