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छत्तीसगढ़ में फिर शुरू होगी ‘चरण पादुका योजना’: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का बड़ा ऐलान

ICN24 Newsroom 2 जुल॰ 2026, 08:31 pm
छत्तीसगढ़ में फिर शुरू होगी ‘चरण पादुका योजना’: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का बड़ा ऐलान

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने छत्तीसगढ़ में ‘चरण पादुका योजना’ को फिर से शुरू करने की घोषणा की है, जिसे पिछली सरकार ने बंद कर दिया था।

रायपुर: छत्तीसगढ़ की राजनीति में जनहितकारी योजनाओं को लेकर एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने राज्य में ‘चरण पादुका योजना’ को पुनर्जीवित करने का एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। मंगलवार को रायपुर में मीडिया से बात करते हुए मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार समाज के उस वर्ग के साथ खड़ी है जिसे पिछली सरकार ने अनदेखा किया था। साय ने कहा कि चरण पादुका योजना, जो वनवासियों और तेंदूपत्ता संग्राहकों के लिए एक जीवनरेखा की तरह थी, उसे कांग्रेस की पूर्ववर्ती सरकार ने बिना किसी ठोस कारण के बंद कर दिया था। अब भाजपा सरकार इसे फिर से शुरू करने के लिए पूरी तरह तैयार है। चरण पादुका योजना का मुख्य उद्देश्य राज्य के सुदूर वनांचलों में रहने वाले तेंदूपत्ता संग्राहकों और वन श्रमिकों को जूते और चप्पल उपलब्ध कराना है। छत्तीसगढ़ जैसे राज्य में, जहाँ एक बड़ी आबादी जंगलों और पथरीले रास्तों पर काम करती है, यह योजना केवल एक वितरण कार्यक्रम नहीं, बल्कि स्वास्थ्य और सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा है। नंगे पैर जंगलों में काम करने के कारण श्रमिकों को अक्सर सांप के काटने और कांटों से होने वाले संक्रमण का खतरा रहता है। इस योजना के पुनः लागू होने से लाखों वनवासी परिवारों को सीधी राहत मिलने की उम्मीद है। राजनीतिक परिप्रेक्ष्य में देखें तो यह कदम साय सरकार की उस रणनीति का हिस्सा है जिसके तहत वे पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के कार्यकाल की प्रमुख योजनाओं को बहाल कर रहे हैं। गौरतलब है कि रमन सिंह के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ने ही इस योजना की शुरुआत की थी, जिसे बाद में भूपेश बघेल के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने 'अनुपयोगी' बताते हुए रोक दिया था। मुख्यमंत्री साय ने इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि लोक कल्याणकारी योजनाओं को राजनीतिक विद्वेष की भेंट नहीं चढ़ना चाहिए। इस खबर का प्रभाव केवल छत्तीसगढ़ तक ही सीमित नहीं है, बल्कि ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय, विशेष रूप से छत्तीसगढ़ी प्रवासियों के बीच भी इसे सकारात्मक दृष्टिकोण से देखा जा रहा है। प्रवासी भारतीय अक्सर अपने पैतृक राज्यों में हो रहे बुनियादी बदलावों और आदिवासी कल्याण की खबरों में गहरी रुचि रखते हैं। कैनबरा और सिडनी जैसे शहरों में बसे छत्तीसगढ़ी मूल के लोग सोशल मीडिया पर इस फैसले की सराहना कर रहे हैं, क्योंकि यह सीधे तौर पर उनके राज्य की जमीनी हकीकत और सबसे कमजोर तबके के सशक्तिकरण से जुड़ा है। आने वाले महीनों में सरकार इस योजना के क्रियान्वयन के लिए बजट और वितरण रूपरेखा तैयार करेगी। जानकारों का मानना है कि इस योजना की वापसी से भाजपा ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में अपनी पकड़ और मजबूत करेगी। मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया है कि योजना का लाभ पारदर्शी तरीके से अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाया जाएगा, ताकि छत्तीसगढ़ के 'हर हाथ को काम और हर पैर को सम्मान' मिल सके।
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