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कार्नेगी की ‘ग्रेट इमिग्रेंट्स-2026’ सूची में चार भारतीय-अमेरिकियों का दबदबा; प्रवासियों की वैश्विक सफलता का प्रतीक
ICN24 Newsroom 2 जुल॰ 2026, 05:31 pm

कार्नेगी कॉर्पोरेशन ऑफ न्यूयॉर्क ने अपनी 'ग्रेट इमिग्रेंट्स-2026' सूची में निकेश अरोड़ा और महजरीन बनजी सहित चार भारतीय-अमेरिकियों को सम्मानित किया है।
कार्नेगी कॉर्पोरेशन ऑफ न्यूयॉर्क ने वर्ष 2026 की अपनी प्रतिष्ठित 'ग्रेट इमिग्रेंट्स' (महान प्रवासी) सूची जारी कर दी है। इस वर्ष की सूची में चार प्रभावशाली भारतीय-अमेरिकियों को स्थान मिला है, जिन्होंने अपने असाधारण कार्यों और नेतृत्व से अमेरिकी समाज और वैश्विक परिदृश्य पर गहरी छाप छोड़ी है। इन सम्मानित व्यक्तियों में साइबर सुरक्षा दिग्गज निकेश अरोड़ा और हार्वर्ड विश्वविद्यालय की प्रसिद्ध प्रोफेसर महजरीन बनजी प्रमुखता से शामिल हैं।
यह सम्मान उन प्रवासियों को दिया जाता है जिन्होंने नागरिकता प्राप्त करने के बाद अपने देश की प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। निकेश अरोड़ा, जो वर्तमान में 'पालो ऑल्टो नेटवर्क्स' के सीईओ हैं, को तकनीकी नवाचार और साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में उनके नेतृत्व के लिए पहचाना गया है। वहीं, महजरीन बनजी को मनोविज्ञान के क्षेत्र में उनके क्रांतिकारी शोध, विशेष रूप से 'इंप्लिसिट बायस' (अंतर्निहित पूर्वाग्रह) को समझने की दिशा में किए गए उनके कार्यों के लिए सम्मानित किया गया है।
कार्नेगी कॉर्पोरेशन के अनुसार, यह सूची एंड्रयू कार्नेगी की विरासत को आगे बढ़ाती है, जो स्वयं एक स्कॉटिश प्रवासी थे और उनका मानना था कि प्रवासी देश की लोकतान्त्रिक शक्ति और आर्थिक समृद्धि का आधार होते हैं। इस वर्ष की सूची में शामिल अन्य दो भारतीय-अमेरिकी नागरिकों ने भी विज्ञान और कला के क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं, जो वैश्विक स्तर पर भारतीय प्रतिभा के बढ़ते प्रभाव को दर्शाता है।
ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए यह खबर विशेष प्रेरणा का स्रोत है। जिस तरह अमेरिका में भारतीय मूल के नागरिक शीर्ष पदों पर अपनी योग्यता साबित कर रहे हैं, ठीक वैसा ही रुझान ऑस्ट्रेलिया में भी देखा जा रहा है। ऑस्ट्रेलिया की 2021 की जनगणना और हालिया डेटा बताते हैं कि भारतीय मूल के लोग यहाँ सबसे तेजी से बढ़ने वाले और अत्यधिक शिक्षित प्रवासी समूहों में से एक हैं। चाहे वह मेलबर्न का टेक सेक्टर हो या सिडनी का स्वास्थ्य ढांचा, भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई नागरिक भी उसी तरह की उपलब्धियां हासिल कर रहे हैं जैसी आज अमेरिका में सराही जा रही हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की अंतर्राष्ट्रीय पहचान न केवल व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि यह प्रवासियों के प्रति समाज के नजरिए को भी सकारात्मक बनाती है। 'ग्रेट इमिग्रेंट्स' जैसी पहल यह याद दिलाती है कि नवाचार और विकास किसी सीमा के मोहताज नहीं होते। भारत से निकले ये सितारे आज अपनी कर्मभूमि में बदलाव के वाहक बने हुए हैं, जो अगली पीढ़ी के लिए एक मार्गदर्शक का कार्य करेंगे।
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