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ईरान का बड़ा कूटनीतिक कदम: खामेनेई के अंतिम संस्कार के लिए पीएम मोदी, बीजेपी और कांग्रेस अध्यक्षों को न्योता

ICN24 Newsroom 2 जुल॰ 2026, 01:31 pm
ईरान का बड़ा कूटनीतिक कदम: खामेनेई के अंतिम संस्कार के लिए पीएम मोदी, बीजेपी और कांग्रेस अध्यक्षों को न्योता

ईरान ने सर्वोच्च नेता के अंतिम संस्कार के लिए भारत के प्रधानमंत्री और प्रमुख राजनीतिक दलों के अध्यक्षों सहित शिया सांसदों को भी आमंत्रित किया है।

ईरान ने एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक संकेत देते हुए भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ-साथ देश के प्रमुख राजनीतिक नेतृत्व को सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए आधिकारिक निमंत्रण भेजा है। तेहरान द्वारा भेजे गए इस निमंत्रण पत्र में न केवल सत्ता पक्ष, बल्कि प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस के अध्यक्ष को भी शामिल किया गया है, जो अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में एक दुर्लभ घटना मानी जा रही है। आमतौर पर ऐसे राजकीय कार्यक्रमों में केवल सरकार के प्रतिनिधियों को ही आमंत्रित किया जाता है, लेकिन ईरान का यह कदम भारत के साथ उसके बहुआयामी और ऐतिहासिक संबंधों की गहराई को दर्शाता है। विवरण के अनुसार, ईरान ने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष को विशेष तौर पर आमंत्रित किया है। इसके अलावा, जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती को भी इस सूची में जगह दी गई है। धार्मिक और सांस्कृतिक संबंधों को महत्व देते हुए, ईरान ने भारतीय संसद के प्रमुख शिया सदस्यों को भी न्योता भेजा है, जिनमें रुहुल्ला मेहदी, हाजी हनीफा, इमरान मसूद और अफजल अंसारी शामिल हैं। यह प्रतिनिधित्व भारत के भीतर मौजूद विविध सांस्कृतिक और धार्मिक पहचानों के प्रति ईरान के सम्मान को प्रदर्शित करता है। भारत और ईरान के बीच संबंध सदियों पुराने हैं, जो व्यापार, संस्कृति और ऊर्जा सुरक्षा पर आधारित हैं। सामरिक दृष्टिकोण से, चाबहार बंदरगाह परियोजना दोनों देशों के बीच सहयोग का सबसे बड़ा उदाहरण है। भारत के लिए ईरान न केवल ऊर्जा का एक महत्वपूर्ण स्रोत रहा है, बल्कि मध्य एशिया और यूरोप तक पहुँचने के लिए एक रणनीतिक गलियारा भी प्रदान करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस स्तर पर भारतीय राजनीतिक नेतृत्व को आमंत्रित करना यह दर्शाता है कि ईरान भारत में सत्ता के सभी केंद्रों के साथ अपने संबंधों को मजबूत बनाए रखना चाहता है। ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय, विशेष रूप से सिडनी और मेलबर्न जैसे शहरों में रहने वाले प्रवासी, इन कूटनीतिक घटनाक्रमों को बारीकी से देख रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया में भारतीय मूल के कई लोग ऐसे क्षेत्रों से आते हैं जिनके ऐतिहासिक संबंध ईरान के साथ रहे हैं। भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय के लिए, भारत की विदेश नीति का संतुलन—विशेष रूप से पश्चिम एशिया के देशों और पश्चिमी देशों के बीच—अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह निमंत्रण भारत की 'सॉफ्ट पावर' और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसकी बढ़ती स्वीकार्यता का प्रमाण है। फिलहाल, भारत सरकार और संबंधित राजनीतिक दलों ने इस निमंत्रण पर अपनी आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। प्रोटोकॉल के अनुसार, ऐसे उच्च-स्तरीय दौरों का निर्णय सुरक्षा और कूटनीतिक संवेदनशीलता को ध्यान में रखकर लिया जाता है। यदि प्रधानमंत्री या कोई उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल तेहरान जाता है, तो यह आने वाले समय में भारत-ईरान संबंधों को एक नई दिशा दे सकता है, विशेष रूप से बदलते वैश्विक समीकरणों के बीच जहां भारत एक प्रमुख विश्व शक्ति के रूप में उभर रहा है।
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