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एज़ केयर लैब्स ने सीरीज बी1 फंडिंग में जुटाए ₹85 करोड़; भारत में बुजुर्गों की देखभाल के बुनियादी ढांचे को मिलेगी मजबूती
ICN24 Newsroom 2 जुल॰ 2026, 07:31 pm

भारत के प्रमुख एल्डर केयर प्लेटफॉर्म एज़ केयर लैब्स ने ₹85 करोड़ जुटाए हैं। यह निवेश ऑस्ट्रेलिया में रह रहे उन प्रवासी भारतीयों के लिए राहत की खबर है जिनके माता-पिता भारत में अकेले रहते हैं।
भारत में बुजुर्गों की देखभाल के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण विकास के तहत, प्रमुख एल्डर केयर प्लेटफॉर्म 'एज़ केयर लैब्स' (Age Care Labs) ने अपने सीरीज बी1 फंडिंग राउंड में ₹85 करोड़ (लगभग 9 मिलियन अमेरिकी डॉलर) जुटाने की घोषणा की है। यह निवेश कंपनी के व्यापक सीरीज बी राउंड का हिस्सा है, जिसके तहत कुल ₹250 करोड़ (30 मिलियन अमेरिकी डॉलर) जुटाने का लक्ष्य रखा गया है। यह फंड कंपनी के दो प्रमुख ब्रांडों—'इमोहा' (Emoha) और 'एपिक एल्डर केयर' (Epoch Elder Care) के विस्तार और सेवाओं को बेहतर बनाने में उपयोग किया जाएगा।
भारत में वृद्धों की बढ़ती आबादी और बदलते पारिवारिक ढांचे के बीच, एज़ केयर लैब्स ने खुद को एक भरोसेमंद समाधान के रूप में स्थापित किया है। कंपनी मुख्य रूप से दो मोर्चों पर काम करती है: इमोहा जहां बुजुर्गों को उनके घर पर ही स्वास्थ्य और आपातकालीन सहायता प्रदान करता है, वहीं एपिक एल्डर केयर विशेष रूप से डिमेंशिया और दीर्घकालिक देखभाल की आवश्यकता वाले बुजुर्गों के लिए 'असिस्टेड लिविंग' की सुविधा देता है।
यह विकास ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए विशेष महत्व रखता है। ऑस्ट्रेलिया में कार्यरत हजारों भारतीय पेशेवर 'सैंडविच जनरेशन' का हिस्सा हैं, जो एक तरफ ऑस्ट्रेलिया में अपने बच्चों के भविष्य को संवार रहे हैं, तो दूसरी तरफ भारत में रह रहे अपने बुजुर्ग माता-पिता के स्वास्थ्य और सुरक्षा को लेकर चिंतित रहते हैं। भारत में पेशेवर एल्डर केयर सेवाओं की कमी और आपातकालीन स्थितियों में त्वरित सहायता न मिल पाना प्रवासियों के लिए हमेशा से एक बड़ी मानसिक चुनौती रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की 'सिल्वर इकोनॉमी' (बुजुर्गों से जुड़ी अर्थव्यवस्था) तेजी से बढ़ रही है। पारंपरिक संयुक्त परिवार प्रणाली के सिमटने और पेशेवर काम के लिए युवाओं के विदेश जाने के कारण, अब बुजुर्गों के लिए तकनीक-संचालित और विश्वसनीय देखभाल प्रणालियों की मांग बढ़ी है। एज़ केयर लैब्स की इस नई फंडिंग से न केवल सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार होगा, बल्कि यह टियर-2 और टियर-3 शहरों में भी अपनी पहुंच बढ़ा सकेगा।
कंपनी के अनुसार, इस पूंजी का उपयोग तकनीक को और अधिक सशक्त बनाने के लिए किया जाएगा ताकि दूर बैठे बच्चे (जैसे ऑस्ट्रेलिया या अमेरिका में रह रहे एनआरआई) अपने माता-पिता के स्वास्थ्य मापदंडों की वास्तविक समय (Real-time) में निगरानी कर सकें। इसके अलावा, आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली को और अधिक चुस्त बनाने पर भी जोर दिया जाएगा। इमोहा ने पहले ही भारत के कई शहरों में हजारों परिवारों का भरोसा जीता है, और अब यह निवेश उन्हें अधिक व्यापक स्तर पर सेवाएं प्रदान करने में मदद करेगा।
अंततः, यह निवेश केवल एक व्यावसायिक उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह भारत में बुजुर्गों की जीवनशैली में सुधार की दिशा में एक बड़ा कदम है। प्रवासी भारतीयों के लिए, यह एक ऐसा पुल है जो उन्हें मीलों दूर रहकर भी अपने माता-पिता की सुरक्षा का आश्वासन देता है।
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