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क्या हर दिल के मरीज को पेसमेकर की जरूरत होती है? कार्डियोलॉजिस्ट ने बताए इसके पीछे के मिथक और सच

ICN24 Newsroom 2 जुल॰ 2026, 08:31 pm
क्या हर दिल के मरीज को पेसमेकर की जरूरत होती है? कार्डियोलॉजिस्ट ने बताए इसके पीछे के मिथक और सच

पेसमेकर को लेकर अक्सर लोगों में डर और भ्रम रहता है। हृदय रोग विशेषज्ञों के अनुसार, हर दिल के मरीज को इसकी जरूरत नहीं होती। जानें इसके संकेत और सावधानियां।

हृदय रोग आज के समय में एक गंभीर वैश्विक स्वास्थ्य चुनौती बन चुका है, विशेष रूप से भारतीय मूल के लोगों में इसकी व्यापकता अधिक देखी जाती है। जब भी दिल की बीमारी की बात आती है, तो 'पेसमेकर' एक ऐसा शब्द है जो कई रोगियों के मन में डर पैदा कर देता है। आम धारणा यह है कि यदि किसी को दिल की समस्या है, तो उसे अंततः पेसमेकर की आवश्यकता होगी। हालांकि, हृदय रोग विशेषज्ञों (Cardiologists) का कहना है कि यह एक बहुत बड़ा मिथक है। पेसमेकर हर दिल के मरीज के लिए नहीं, बल्कि विशिष्ट स्थितियों के लिए होता है। पेसमेकर वास्तव में एक छोटा सा इलेक्ट्रॉनिक उपकरण है जिसे छाती या पेट में प्रत्यारोपित किया जाता है। इसका मुख्य कार्य दिल की धड़कन को नियंत्रित करना है। यह तब काम आता है जब दिल की अपनी प्राकृतिक विद्युत प्रणाली (Electrical System) ठीक से काम नहीं करती है। विशेषज्ञों के अनुसार, पेसमेकर की आवश्यकता मुख्य रूप से 'ब्राडीकार्डिया' (Bradycardia) नामक स्थिति में होती है, जिसमें दिल की धड़कन असामान्य रूप से धीमी हो जाती है। इसके अलावा, यदि किसी मरीज का 'हार्ट ब्लॉक' हो गया है, जहाँ विद्युत संकेत दिल के ऊपरी कक्षों से निचले कक्षों तक नहीं पहुँच पाते, तो पेसमेकर जीवन रक्षक साबित होता है। ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय के लिए यह जानकारी और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। सांख्यिकी दर्शाती है कि दक्षिण एशियाई मूल के लोगों में हृदय रोगों का जोखिम अन्य समुदायों की तुलना में अधिक होता है। यहाँ के विशेषज्ञों का कहना है कि पेसमेकर को लेकर कई गलतफहमियां मौजूद हैं। उदाहरण के लिए, कई लोग मानते हैं कि पेसमेकर लगवाने के बाद व्यक्ति सक्रिय जीवन नहीं जी सकता। सच्चाई इसके बिल्कुल विपरीत है। पेसमेकर लगने के बाद अधिकांश मरीज न केवल बेहतर महसूस करते हैं, बल्कि वे व्यायाम, यात्रा और अपनी सामान्य दिनचर्या को अधिक ऊर्जा के साथ जारी रख सकते हैं। पेसमेकर की जरूरत कब है, इसे पहचानने के लिए कुछ चेतावनी भरे संकेतों पर ध्यान देना अनिवार्य है। यदि आपको बार-बार चक्कर आते हैं, अचानक बेहोशी महसूस होती है, या मामूली शारीरिक परिश्रम करने पर भी सांस फूलने लगती है और अत्यधिक थकान होती है, तो यह संकेत हो सकता है कि आपके दिल की धड़कन पर्याप्त नहीं है। ऐसी स्थिति में कार्डियोलॉजिस्ट ईसीजी (ECG) या होल्टर मॉनिटरिंग के जरिए दिल की लय की जांच करते हैं। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि केवल 'धमनियों में रुकावट' (Blockage) होने का मतलब यह नहीं है कि आपको पेसमेकर की आवश्यकता है; रुकावट के लिए अक्सर स्टेंट या बाईपास सर्जरी की सलाह दी जाती है। आधुनिक तकनीक ने पेसमेकर को पहले से कहीं अधिक सुरक्षित और छोटा बना दिया है। आजकल 'लीडलेस पेसमेकर' भी उपलब्ध हैं जो बिना किसी तार के सीधे दिल के अंदर फिट हो जाते हैं। पेसमेकर की बैटरी भी अब 10 से 15 साल तक चलती है। विशेषज्ञों का कहना है कि मरीजों को डॉक्टर के साथ खुलकर चर्चा करनी चाहिए और इंटरनेट पर मौजूद आधी-अधूरी जानकारी से बचना चाहिए। सही समय पर सही निदान ही हृदय स्वास्थ्य की कुंजी है।
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