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'अभिव्यक्ति की आजादी का मतलब गाली देना नहीं': पवन कल्याण ने मर्यादा और आलोचना पर दिया कड़ा संदेश

ICN24 Newsroom 2 जुल॰ 2026, 06:31 pm
'अभिव्यक्ति की आजादी का मतलब गाली देना नहीं': पवन कल्याण ने मर्यादा और आलोचना पर दिया कड़ा संदेश

आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण ने अभिव्यक्ति की आजादी और सोशल मीडिया पर बढ़ती अभद्रता को लेकर कड़ा रुख अपनाया है।

आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री और जनसेना पार्टी के प्रमुख पवन कल्याण ने एक बार फिर सार्वजनिक विमर्श और सोशल मीडिया पर बढ़ती अभद्रता को लेकर अपनी चिंता जाहिर की है। एक हालिया बयान में कल्याण ने स्पष्ट किया कि लोकतंत्र में अभिव्यक्ति की आजादी एक मौलिक अधिकार है, लेकिन इसका अर्थ यह कतई नहीं है कि किसी को व्यक्तिगत रूप से अपमानित किया जाए या अपशब्दों का प्रयोग किया जाए। उन्होंने जोर देकर कहा कि लोगों को सरकार के फैसलों की आलोचना करने का पूरा हक है, बशर्ते वह मर्यादित और रचनात्मक तरीके से हो। पवन कल्याण का यह बयान उस समय आया है जब भारत में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर राजनीतिक बहस अक्सर व्यक्तिगत हमलों और ट्रोलिंग का रूप ले लेती है। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि सत्ता में बैठे लोगों या उनके नीतिगत निर्णयों पर सवाल उठाना स्वस्थ लोकतंत्र की पहचान है, लेकिन जब आलोचना का स्तर गिरकर गाली-गलौज तक पहुँच जाता है, तो वह अभिव्यक्ति की आजादी के दायरे से बाहर हो जाता है। उन्होंने राजनेताओं और जनता दोनों से सार्वजनिक जीवन में गरिमा बनाए रखने की अपील की। विशेष रूप से ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में बसे भारतीय समुदाय के लिए यह मुद्दा काफी प्रासंगिक है। सिडनी, मेलबर्न और पर्थ जैसे शहरों में रहने वाले प्रवासी भारतीय अपने गृह राज्यों की राजनीति में गहरी रुचि रखते हैं। सोशल मीडिया के माध्यम से वे अक्सर इन चर्चाओं का हिस्सा बनते हैं। पवन कल्याण के इस संदेश को एक व्यापक संदर्भ में देखा जा सकता है, जहाँ डिजिटल स्पेस में सक्रिय प्रवासी भारतीयों को भी यह याद दिलाने की कोशिश की गई है कि वैचारिक मतभेदों के बावजूद संवाद का स्तर ऊँचा रहना चाहिए। पवन कल्याण ने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि संवैधानिक अधिकार जिम्मेदारियों के साथ आते हैं। उन्होंने कहा कि संवैधानिक प्रावधान हमें अपने विचार व्यक्त करने की अनुमति देते हैं, न कि दूसरों के चरित्र हनन की। आंध्र प्रदेश की वर्तमान राजनीतिक स्थिति और हाल के चुनावों के बाद के घटनाक्रमों को देखते हुए, उनके इस बयान को उन सोशल मीडिया समूहों के लिए एक चेतावनी माना जा रहा है जो अक्सर सीमाओं को लांघते हैं। अंत में, उपमुख्यमंत्री ने प्रशासन और पुलिस को भी सोशल मीडिया पर अभद्र भाषा और चरित्र हनन के मामलों में सक्रियता दिखाने का संकेत दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि शांतिपूर्ण और सभ्य समाज के निर्माण के लिए भाषा की मर्यादा सर्वोपरि है। कल्याण के इस रुख को बुद्धिजीवी वर्ग और जागरूक नागरिकों का समर्थन मिल रहा है, जो डिजिटल युग में बढ़ती विषाक्तता (toxicity) से चिंतित हैं।
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