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चंदौली: मां काली के विग्रह का जलाधिवास और फलाधिवास संपन्न, भक्तिमय वातावरण में गूंजे वैदिक मंत्र

ICN24 Newsroom 7 जुल॰ 2026, 08:31 am
चंदौली: मां काली के विग्रह का जलाधिवास और फलाधिवास संपन्न, भक्तिमय वातावरण में गूंजे वैदिक मंत्र

उत्तर प्रदेश के चंदौली में मां काली मंदिर के प्राण-प्रतिष्ठा समारोह के दौरान जलाधिवास और फलाधिवास के अनुष्ठान सफलतापूर्वक संपन्न हुए, जिसमें भारी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया।

उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले में इन दिनों आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रवाह चरम पर है। नवनिर्मित मां काली मंदिर में मूर्ति की प्राण-प्रतिष्ठा से पूर्व आयोजित होने वाले विशेष अनुष्ठानों की श्रृंखला में 'जलाधिवास' और 'फलाधिवास' के चरण सफलतापूर्वक संपन्न हो गए हैं। क्षेत्रीय परंपराओं और वैदिक विधि-विधान के अनुसार आयोजित इस कार्यक्रम में स्थानीय निवासियों के साथ-साथ दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। धार्मिक शास्त्रों के अनुसार, किसी भी विग्रह की प्राण-प्रतिष्ठा से पूर्व उसे विभिन्न तत्वों में वास कराया जाता है। इसी प्रक्रिया के तहत मां काली की प्रतिमा को पहले 'जलाधिवास' कराया गया, जिसमें मूर्ति को पवित्र जल में डुबोकर रखा जाता है। यह प्रक्रिया प्रतिमा के शुद्धिकरण और उसमें चेतना जागृत करने का प्रथम सोपान मानी जाती है। इसके पश्चात 'फलाधिवास' का अनुष्ठान किया गया, जहां देवी के विग्रह को विभिन्न मौसमी फलों और औषधियों के साथ रखा गया। यह अनुष्ठान प्रकृति और शक्ति के अटूट संबंध को दर्शाता है। मंदिर परिसर में आयोजित मंडप पूजन के दौरान आचार्यों ने वेदी निर्माण और कलश स्थापना की प्रक्रियाओं को मंत्रोच्चार के साथ पूरा किया। मुख्य यजमानों ने पूर्ण श्रद्धा के साथ आहुतियां दीं और क्षेत्र की सुख-समृद्धि की कामना की। आयोजन समिति के सदस्यों ने बताया कि यह कार्यक्रम केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह स्थानीय सामाजिक समरसता का प्रतीक भी है। आयोजन की व्यवस्था में स्थानीय प्रशासन और राजनीतिक नेतृत्व ने भी सक्रिय सहयोग प्रदान किया है, जिससे यह एक बड़े सामुदायिक उत्सव के रूप में उभरा है। इस समाचार का महत्व केवल चंदौली तक सीमित नहीं है। ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय के लिए भी इस तरह की खबरें उनकी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ाव का माध्यम बनती हैं। सिडनी, मेलबर्न और ब्रिस्बेन जैसे शहरों में स्थित भारतीय मंदिरों में भी इसी तरह के अनुष्ठान समय-समय पर आयोजित किए जाते हैं। आईसीएम24 (ICN24) से बात करते हुए, सिडनी के एक मंदिर न्यासी ने बताया कि भारत में हो रहे इन पारंपरिक आयोजनों का विवरण प्रवासी भारतीयों को अपनी अगली पीढ़ी को हिंदू धर्म के सूक्ष्म पहलुओं को समझाने में मदद करता है। आने वाले दिनों में मूर्ति की 'अन्नाधिवास' और 'शय्याधिवास' की प्रक्रिया पूरी की जाएगी, जिसके बाद भव्य नगर भ्रमण और अंततः प्राण-प्रतिष्ठा का आयोजन होगा। चंदौली का यह आयोजन आज के राजनीतिक और सामाजिक परिदृश्य में भारतीय संस्कृति की जीवंतता को प्रदर्शित करता है, जहां विकास के साथ-साथ अपनी विरासत को सहेजने का प्रयास भी निरंतर जारी है।
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