ऑस्ट्रेलिया
बोलीविया में गंभीर संकट: छह सप्ताह की नाकेबंदी के बाद राष्ट्रपति ने लगाया देशव्यापी आपातकाल
ICN24 Newsroom 20 जून 2026, 03:24 pm
बोलीविया के राष्ट्रपति रोड्रिगो पाज़ ने देश में छह सप्ताह से जारी विरोध प्रदर्शनों और आर्थिक नाकेबंदी के कारण आपातकाल की घोषणा की है।
बोलीविया के राष्ट्रपति रोड्रिगो पाज़ ने देश में जारी राजनीतिक और आर्थिक अस्थिरता को देखते हुए देशव्यापी आपातकाल (स्टेट ऑफ इमरजेंसी) की घोषणा कर दी है। यह निर्णय पिछले छह सप्ताह से अधिक समय से चल रहे विरोध प्रदर्शनों और प्रमुख राजमार्गों पर की गई नाकेबंदी के बाद लिया गया है। इस नाकेबंदी के कारण दक्षिण अमेरिकी राष्ट्र की आपूर्ति श्रृंखला पूरी तरह से ध्वस्त हो गई है, जिससे देश में भोजन, ईंधन और दवाइयों की भारी किल्लत पैदा हो गई है।
राष्ट्रपति पाज़ ने राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में कहा कि यह कदम कानून-व्यवस्था बहाल करने और नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए आवश्यक था। उन्होंने प्रदर्शनकारियों पर आरोप लगाया कि वे लोकतांत्रिक प्रक्रिया को बाधित कर रहे हैं और देश की अर्थव्यवस्था को जानबूझकर नुकसान पहुंचा रहे हैं। आपातकाल लागू होने के बाद, अब सेना और पुलिस को सड़कों को खाली कराने और सार्वजनिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अतिरिक्त अधिकार दिए गए हैं।
बोलीविया में यह संकट तब शुरू हुआ जब विभिन्न समूहों ने सरकार की नीतियों के खिलाफ सड़कों पर उतरना शुरू किया। नाकेबंदी के कारण विशेष रूप से ला पाज़ और सांता क्रूज़ जैसे बड़े शहरों में आवश्यक वस्तुओं की कीमतें आसमान छू रही हैं। व्यापारियों का कहना है कि सामान से लदे हजारों ट्रक हफ्तों से फंसे हुए हैं, जिससे करोड़ों डॉलर का नुकसान हो रहा है।
ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए भी यह खबर महत्वपूर्ण है, क्योंकि दक्षिण अमेरिका में होने वाली किसी भी बड़ी हलचल का असर वैश्विक बाजारों पर पड़ता है। ऑस्ट्रेलिया और बोलीविया दोनों ही खनिज संसाधनों, विशेष रूप से लिथियम के बड़े उत्पादक हैं। बोलीविया में अस्थिरता से वैश्विक ऊर्जा और तकनीकी क्षेत्र में आपूर्ति संबंधी चिंताएं पैदा हो सकती हैं, जिसका प्रभाव ऑस्ट्रेलियाई निवेश और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर पड़ सकता है। इसके अलावा, ऑस्ट्रेलिया में बसे दक्षिण अमेरिकी मूल के लोगों और भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई व्यापारियों के लिए यह स्थिति चिंता का विषय बनी हुई है।
अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का मानना है कि आपातकाल की यह घोषणा स्थिति को और अधिक तनावपूर्ण बना सकती है। मानवाधिकार संगठनों ने सरकार से अपील की है कि वह बल प्रयोग के बजाय बातचीत का रास्ता अपनाए। हालांकि, राष्ट्रपति कार्यालय ने स्पष्ट किया है कि जब तक सभी प्रमुख मार्गों से नाकेबंदी नहीं हट जाती, तब तक सख्त कदम जारी रहेंगे। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या सेना के हस्तक्षेप से आपूर्ति बहाल हो पाती है या फिर विरोध प्रदर्शन और अधिक उग्र रूप ले लेते हैं।
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