राजनीति
बिहार पंचायत चुनाव: आरक्षण रोस्टर पर फंसा पेंच, 15 जून तक नई गाइडलाइन का इंतजार
ICN24 Newsroom 9 जून 2026, 01:30 am

बिहार में पंचायत चुनाव की सुगबुगाहट तेज है, लेकिन आरक्षण रोस्टर के निर्धारण में हो रही देरी ने उम्मीदवारों की चिंता बढ़ा दी है। प्रशासन अब 15 जून की समयसीमा की ओर देख रहा है।
बिहार में त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों को लेकर प्रशासनिक तैयारियां अपने चरम पर हैं, लेकिन आरक्षण रोस्टर को लेकर जारी अनिश्चितता ने भावी उम्मीदवारों और राजनीतिक हलकों में बेचैनी पैदा कर दी है। राज्य निर्वाचन आयोग और पंचायती राज विभाग फिलहाल नई गाइडलाइन तैयार करने में जुटे हैं, जिसके 15 जून तक जारी होने की संभावना है। इस देरी के कारण कई निर्वाचन क्षेत्रों में चुनावी समीकरण स्पष्ट नहीं हो पा रहे हैं।
राजधानी पटना सहित राज्य के सभी जिलों में परिसीमन और मतदाता सूची के पुनरीक्षण का कार्य लगभग पूरा हो चुका है। हालांकि, सबसे बड़ी चुनौती उन पदों को लेकर है जो अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग और महिलाओं के लिए आरक्षित होने हैं। बिहार में महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान है, जिसे लागू करने के लिए रोटेशन प्रणाली का पालन किया जाता है। प्रशासन इस बात का बारीकी से अध्ययन कर रहा है कि पिछले चुनावों में कौन सी सीटें किस वर्ग के लिए आरक्षित थीं, ताकि इस बार चक्रीय पद्धति (Rotation Policy) को सही ढंग से लागू किया जा सके।
बिहार से ताल्लुक रखने वाले प्रवासी भारतीयों और विशेषकर ऑस्ट्रेलिया में रह रहे बिहारी समुदाय के लिए यह खबर महत्वपूर्ण है। ऑस्ट्रेलिया में बसे कई भारतीय अपनी जड़ों और पैतृक गांवों के विकास में गहरी रुचि रखते हैं। पंचायत चुनावों के माध्यम से स्थानीय नेतृत्व का चयन होता है, जो सीधे तौर पर ग्रामीण विकास और बुनियादी ढांचे को प्रभावित करता है। सिडनी और मेलबर्न जैसे शहरों में रहने वाले बिहार मूल के लोग अक्सर इन चुनावों के दौरान सोशल मीडिया के माध्यम से अपने गांवों के उम्मीदवारों का समर्थन करते हैं या निवेश संबंधी योजनाओं पर चर्चा करते हैं।
पंचायती राज विभाग के सूत्रों के अनुसार, 15 जून तक आने वाली नई गाइडलाइन में आरक्षण की प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी बनाने पर जोर दिया जाएगा। चुनाव आयोग का लक्ष्य है कि मानसून की सक्रियता से पहले या उसके तुरंत बाद चुनावी प्रक्रिया को सुव्यवस्थित कर लिया जाए। जैसे ही रोस्टर स्पष्ट होगा, मुखिया, सरपंच, वार्ड सदस्य और जिला परिषद सदस्यों के पदों के लिए नामांकन की होड़ शुरू हो जाएगी। फिलहाल, संभावित प्रत्याशी असमंजस में हैं कि उनकी पारंपरिक सीट इस बार उनके वर्ग के लिए सुरक्षित रहेगी या नहीं।
आगामी दिनों में जिलाधिकारियों को रोस्टर तैयार करने के लिए विशेष निर्देश दिए जाएंगे। एक बार राज्य स्तर से हरी झंडी मिलने के बाद, जिला स्तर पर प्रारुप का प्रकाशन किया जाएगा और आपत्तियां मांगी जाएंगी। इसके बाद ही आरक्षण की अंतिम सूची सार्वजनिक होगी। तब तक, बिहार की ग्रामीण राजनीति में 'इंतजार और देखो' की स्थिति बनी हुई है।
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