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बिहार सरकार ने प्रवासी श्रमिकों के परिवारों को दिया 12.22 करोड़ का मुआवजा, सहायता राशि में बड़ी बढ़ोतरी

ICN24 Newsroom 20 जून 2026, 07:07 am
बिहार सरकार ने प्रवासी श्रमिकों के परिवारों को दिया 12.22 करोड़ का मुआवजा, सहायता राशि में बड़ी बढ़ोतरी

बिहार सरकार ने पिछले दो वर्षों में 614 मृतक प्रवासी श्रमिकों के परिजनों को 12.22 करोड़ रुपये की सहायता दी है और दुर्घटना मृत्यु राशि बढ़ाकर 4 लाख रुपये कर दी है।

बिहार सरकार ने राज्य के बाहर काम करने वाले प्रवासी श्रमिकों के कल्याण की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए पिछले दो वित्तीय वर्षों के दौरान 614 मृतक श्रमिकों के परिवारों को कुल 12.22 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की है। श्रम संसाधन विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, यह राशि उन श्रमिकों के आश्रितों को दी गई है जिनकी मृत्यु बिहार से बाहर काम करने के दौरान हुई थी। सरकार ने न केवल लंबित दावों का निपटारा किया है, बल्कि भविष्य के लिए दुर्घटना मृत्यु सहायता राशि को भी एक लाख रुपये से बढ़ाकर चार लाख रुपये कर दिया है। इस पहल का उद्देश्य उन परिवारों को सुरक्षा कवच प्रदान करना है जो अपने घर के कमाऊ सदस्य के असामयिक निधन के कारण आर्थिक संकट का सामना करते हैं। बिहार जैसे राज्य के लिए, जहां की एक बड़ी आबादी आजीविका के लिए दूसरे राज्यों और देशों पर निर्भर है, इस तरह की सामाजिक सुरक्षा योजनाएं अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती हैं। श्रम संसाधन विभाग के अनुसार, वर्तमान में 'बिहार श्रमिक' (Bihar Shramik) मोबाइल एप्लिकेशन पर लगभग 6.84 लाख प्रवासी श्रमिक पंजीकृत हो चुके हैं, जिससे सरकारी लाभों का वितरण अब अधिक पारदर्शी और त्वरित हो गया है। ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय के लिए यह खबर विशेष महत्व रखती है क्योंकि प्रवासन और श्रमिकों के अधिकार एक वैश्विक चिंता का विषय हैं। जिस तरह ऑस्ट्रेलिया में कार्यस्थल सुरक्षा (Workplace Safety) और बीमा के कड़े नियम हैं, उसी तर्ज पर बिहार सरकार भी अब तकनीक के माध्यम से अपने श्रमिकों का डेटाबेस तैयार कर रही है। 'बिहार श्रमिक' ऐप के माध्यम से सरकार अब सीधे श्रमिकों तक पहुंच रही है, जिससे बिचौलियों की भूमिका समाप्त हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि सहायता राशि को बढ़ाकर 4 लाख रुपये करना एक सकारात्मक कदम है, लेकिन सबसे बड़ी चुनौती अधिक से अधिक श्रमिकों को पोर्टल पर पंजीकृत करने की है। वर्तमान में पंजीकृत 6.84 लाख का आंकड़ा कुल प्रवासी आबादी का केवल एक हिस्सा है। विभाग ने जिला स्तर पर जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं ताकि असंगठित क्षेत्र के श्रमिक भी अपनी जानकारी दर्ज करा सकें। राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह सहायता राशि केवल उन्हीं परिवारों को मिलेगी जिनके सदस्य विभाग के पोर्टल पर विधिवत पंजीकृत हैं। प्राकृतिक मृत्यु की स्थिति में भी सरकार ने 2 लाख रुपये की सहायता का प्रावधान रखा है। यह नीतिगत बदलाव न केवल वित्तीय सहायता के बारे में है, बल्कि यह उन लाखों परिवारों के प्रति सम्मान और सुरक्षा का भाव भी है जो राज्य की अर्थव्यवस्था में परोक्ष रूप से योगदान दे रहे हैं। आने वाले समय में, सरकार का लक्ष्य इस पंजीकरण प्रक्रिया को और सरल बनाना है ताकि दूर-दराज के क्षेत्रों में रहने वाले श्रमिक भी इसका लाभ उठा सकें।
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