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अमित शाह ने जनसांख्यिकीय बदलाव की जांच कर रही समिति के कार्यों की समीक्षा की
ICN24 Newsroom 14 जून 2026, 01:01 pm

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अवैध अप्रवासन के कारण भारत की जनसांख्यिकी में हो रहे बदलावों का अध्ययन करने वाली उच्च स्तरीय समिति के कामकाज की समीक्षा की।
भारत के केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने देश के विभिन्न हिस्सों में अवैध अप्रवासन के कारण हो रहे जनसांख्यिकीय बदलावों का अध्ययन करने के लिए गठित एक उच्च स्तरीय समिति के कामकाज की विस्तृत समीक्षा की है। मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक के दौरान, शाह ने समिति को पूर्ण सहयोग देने का निर्देश दिया ताकि भारत की सीमाओं और आंतरिक सुरक्षा से जुड़े इस महत्वपूर्ण विषय का व्यापक आकलन किया जा सके।
गृह मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि अवैध अप्रवासन न केवल सुरक्षा के लिए चुनौती है, बल्कि यह स्थानीय संसाधनों और सामाजिक संरचना पर भी गहरा प्रभाव डालता है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे इस मुद्दे के समाधान के लिए ठोस डेटा और वैज्ञानिक पद्धति का उपयोग करें। यह समिति विशेष रूप से उन सीमावर्ती क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित कर रही है जहाँ पिछले कुछ दशकों में आबादी के अनुपात में असामान्य परिवर्तन देखे गए हैं।
बैठक के दौरान शाह ने स्पष्ट किया कि सरकार का लक्ष्य एक ऐसी रणनीति तैयार करना है जो न केवल अवैध घुसपैठ को रोके, बल्कि भविष्य में होने वाले जनसांख्यिकीय असंतुलन को भी नियंत्रित कर सके। उन्होंने समिति से कहा कि वे विभिन्न राज्यों के साथ समन्वय स्थापित करें और उन क्षेत्रों की पहचान करें जहाँ विदेशी घुसपैठियों के कारण स्थानीय निवासियों के अधिकारों पर प्रभाव पड़ रहा है।
भारतीय प्रवासियों और विदेशों में बसे भारतीय समुदाय के लिए भी यह विषय महत्वपूर्ण है। ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय के लोग अक्सर भारत की आंतरिक सुरक्षा और राष्ट्रीय नीतियों में गहरी रुचि रखते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की जनसांख्यिकीय अखंडता को बनाए रखना देश की दीर्घकालिक स्थिरता के लिए आवश्यक है, जिसका सीधा प्रभाव वैश्विक स्तर पर भारत की छवि और प्रवासी भारतीयों के निवेश हितों पर पड़ता है।
समिति की आगामी रिपोर्ट में अवैध अप्रवास को रोकने के लिए तकनीकी समाधानों और कानून में संभावित संशोधनों पर भी चर्चा होने की उम्मीद है। गृह मंत्रालय ने आश्वासन दिया है कि इस प्रक्रिया में पारदर्शिता बरती जाएगी और सभी हितधारकों के सुझावों को ध्यान में रखा जाएगा। यह कदम भारत सरकार के उस व्यापक एजेंडे का हिस्सा है, जिसके तहत राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) और सीमा प्रबंधन को और अधिक सशक्त बनाने की योजना है।
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