लाइव
राजनीति
राजनीति

किताब के शीर्षक पर सोशल मीडिया 'ट्रॉलिंग': सार्वजनिक स्थानों पर निजता और व्यक्तिगत पसंद पर छिड़ी बड़ी बहस

ICN24 Newsroom 5 जुल॰ 2026, 03:31 pm
किताब के शीर्षक पर सोशल मीडिया 'ट्रॉलिंग': सार्वजनिक स्थानों पर निजता और व्यक्तिगत पसंद पर छिड़ी बड़ी बहस

मेट्रो में किताब पढ़ रही महिला का वीडियो वायरल होने के बाद निजता और सोशल मीडिया एथिक्स पर बहस छिड़ गई है। जानें क्यों 'बुक शेमिंग' के खिलाफ खड़े हुए लोग।

सार्वजनिक परिवहन में सफर के दौरान किताब पढ़ना एक सामान्य बात है, लेकिन हाल ही में एक महिला का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद एक नई बहस छिड़ गई है। मेट्रो ट्रेन में सफर कर रही एक महिला केटी ब्रेंट द्वारा लिखित काल्पनिक उपन्यास 'हाउ टू किल मेन एंड गेट अवे विद इट' (How To Kill Men and Get Away With It) पढ़ रही थीं। किसी अजनबी ने उनका वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर डाल दिया, जिसके बाद निजता के अधिकार और 'बुक शेमिंग' को लेकर इंटरनेट दो धड़ों में बंट गया है। प्रारंभ में, वीडियो को इस तरह पेश किया गया जैसे महिला की पसंद संदिग्ध या डरावनी हो। हालांकि, जल्द ही सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं ने वीडियो बनाने वाले व्यक्ति की ही आलोचना शुरू कर दी। आलोचकों का तर्क है कि किसी अजनबी की सहमति के बिना उसका वीडियो बनाना और उसे मजाक बनाने के उद्देश्य से साझा करना न केवल अनैतिक है, बल्कि यह निजता का गंभीर उल्लंघन भी है। भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय के लिए भी यह विषय प्रासंगिक है, क्योंकि सिडनी और मेलबर्न जैसे बड़े शहरों में सार्वजनिक परिवहन के दौरान निजता और सोशल मीडिया शिष्टाचार एक महत्वपूर्ण मुद्दा बनता जा रहा है। यह विवाद केवल एक किताब के शीर्षक तक सीमित नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि 'वायरल संस्कृति' ने लोगों को इस बात के लिए प्रोत्साहित किया है कि वे बिना सोचे-समझे दूसरों के निजी पलों को कैमरे में कैद करें। 'हाउ टू किल मेन एंड गेट अवे विद इट' वास्तव में एक लोकप्रिय डार्क कॉमेडी और व्यंग्यात्मक थ्रिलर है, जो पितृसत्तात्मक समाज और महिलाओं के खिलाफ हिंसा पर कटाक्ष करती है। इस तथ्य को जाने बिना महिला को निशाना बनाना यह दर्शाता है कि कैसे सोशल मीडिया पर संदर्भ (context) को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया जाता है। ऑस्ट्रेलिया में डिजिटल निजता कानूनों पर चर्चा अक्सर होती रहती है। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि हालांकि सार्वजनिक स्थानों पर फोटोग्राफी पूरी तरह प्रतिबंधित नहीं है, लेकिन किसी को अपमानित करने या परेशान करने के उद्देश्य से बनाई गई सामग्री 'ऑनलाइन हरासमेंट' की श्रेणी में आ सकती है। इस घटना ने 'कंसेंट' यानी सहमति के मुद्दे को भी केंद्र में ला दिया है। क्या किसी का सार्वजनिक स्थान पर होना हमें उसे बिना अनुमति के रिकॉर्ड करने का अधिकार देता है? समुदाय के भीतर भी इस पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं हैं। कई लोगों का मानना है कि सोशल मीडिया के दौर में 'पब्लिक शेमिंग' एक हथियार बन गया है, जिसका उपयोग अक्सर उन लोगों के खिलाफ किया जाता है जो केवल अपनी पसंद की चीजें कर रहे होते हैं। इस मामले में, महिला केवल एक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रशंसित फिक्शन किताब पढ़ रही थी। अंततः, यह घटना हमें याद दिलाती है कि डिजिटल युग में दूसरों की सीमाओं का सम्मान करना और किसी को आंकने से पहले पूरी जानकारी प्राप्त करना कितना आवश्यक है।
शेयर:

संबंधित ख़बरें

नीति आयोग का ग्राम सभाओं में कम भागीदारी पर राष्ट्रीय अध्ययन: जमीनी लोकतंत्र को मजबूत करने की बड़ी पहल
राजनीति

नीति आयोग का ग्राम सभाओं में कम भागीदारी पर राष्ट्रीय अध्ययन: जमीनी लोकतंत्र को मजबूत करने की बड़ी पहल

नीति आयोग ग्राम सभाओं में नागरिकों की कम भागीदारी के कारणों पर एक विस्तृत अध्ययन जारी करने वाला है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण स्वशासन को और अधिक प्रभावी बनाना है।

5 जुल॰ 2026, 04:31 pm
भारत-जापान रक्षा सहयोग: भारतीय नौसेना को मिलेगी जापानी 'यूनिकॉर्न' तकनीक, बढ़ेगी समुद्री ताकत
राजनीति

भारत-जापान रक्षा सहयोग: भारतीय नौसेना को मिलेगी जापानी 'यूनिकॉर्न' तकनीक, बढ़ेगी समुद्री ताकत

भारत और जापान ने 'यूनिकॉर्न' तकनीक के सह-विकास के लिए समझौता किया है, जो भारतीय युद्धपोतों को रडार की नजर से बचाने और संचार प्रणाली को बेहतर बनाने में मदद करेगी।

5 जुल॰ 2026, 02:31 pm
अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट: दान में चोरी के आरोपों से उपजा विवाद, जांच की मांग तेज
राजनीति

अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट: दान में चोरी के आरोपों से उपजा विवाद, जांच की मांग तेज

अयोध्या के राम मंदिर ट्रस्ट पर दान की चोरी और वित्तीय अनियमितताओं के गंभीर आरोप लगे हैं, जिससे भारतीय समुदाय और प्रवासियों के बीच चिंता बढ़ गई है।

5 जुल॰ 2026, 01:31 pm
Original text
Rate this translation
Your feedback will be used to help improve Google Translate