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भारत-जापान रक्षा सहयोग: भारतीय नौसेना को मिलेगी जापानी 'यूनिकॉर्न' तकनीक, बढ़ेगी समुद्री ताकत

ICN24 Newsroom 5 जुल॰ 2026, 02:31 pm
भारत-जापान रक्षा सहयोग: भारतीय नौसेना को मिलेगी जापानी 'यूनिकॉर्न' तकनीक, बढ़ेगी समुद्री ताकत

भारत और जापान ने 'यूनिकॉर्न' तकनीक के सह-विकास के लिए समझौता किया है, जो भारतीय युद्धपोतों को रडार की नजर से बचाने और संचार प्रणाली को बेहतर बनाने में मदद करेगी।

भारतीय नौसेना की रणनीतिक क्षमताओं को एक नई ऊंचाई प्रदान करने के उद्देश्य से, भारत और जापान ने एक ऐतिहासिक रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इस समझौते के तहत, जापानी नौसेना द्वारा उपयोग की जाने वाली उन्नत 'यूनिकॉर्न' (UNICORN - Unified Complex Radio Antenna) तकनीक अब भारतीय युद्धपोतों का हिस्सा बनेगी। यह तकनीक न केवल भारतीय जहाजों को रडार की पहुंच से दूर रखने में सक्षम बनाएगी, बल्कि समुद्री युद्ध क्षेत्र में भारत के दबदबे को भी मजबूत करेगी। 'यूनिकॉर्न' एक एकीकृत मास्ट तकनीक है, जिसे अक्सर 'निंजा तकनीक' के रूप में जाना जाता है। पारंपरिक युद्धपोतों पर दर्जनों एंटेना और सेंसर खुले में लगे होते हैं, जो रडार तरंगों को परावर्तित करते हैं, जिससे जहाज को दुश्मन की नजर में आना आसान हो जाता है। इसके विपरीत, यूनिकॉर्न तकनीक इन सभी संचार और टोही प्रणालियों को एक ही चिकने, एकीकृत ढांचे (enclosure) के भीतर समेट देती है। इससे जहाज का 'रडार सिग्नेचर' काफी कम हो जाता है, जिससे वह दुश्मन के सर्विलांस नेटवर्क के लिए अदृश्य सा हो जाता है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता जापान की रक्षा निर्यात नीति में आए एक बड़े बदलाव का संकेत है। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से जापान ने अपनी सैन्य तकनीक के निर्यात पर कड़े प्रतिबंध लगाए थे, लेकिन हिंद-प्रशांत (Indo-Pacific) क्षेत्र में बदलती सुरक्षा चुनौतियों के मद्देनजर अब वह भारत जैसे साझेदारों के साथ रणनीतिक सहयोग बढ़ा रहा है। ऑस्ट्रेलिया के परिप्रेक्ष्य में भी यह विकास महत्वपूर्ण है, क्योंकि भारत, जापान और ऑस्ट्रेलिया 'क्वाड' (Quad) गठबंधन के सदस्य हैं और सामूहिक रूप से एक स्वतंत्र और खुला हिंद-प्रशांत सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। भारतीय नौसेना के लिए यह तकनीक एक 'फोर्स मल्टीप्लायर' साबित होगी। भारत सरकार की 'मेक इन इंडिया' पहल के तहत, इस तकनीक का स्थानीय स्तर पर विकास और एकीकरण किए जाने की संभावना है। इससे न केवल भारत की स्वदेशी जहाज निर्माण क्षमता बढ़ेगी, बल्कि भविष्य के उन्नत युद्धपोतों (जैसे प्रोजेक्ट 17B) को वैश्विक स्तर की स्टील्थ तकनीक से लैस किया जा सकेगा। यह तकनीक विशेष रूप से उन क्षेत्रों में प्रभावी होगी जहां दुश्मन की निगरानी प्रणालियां और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणालियां सक्रिय हैं। कुल मिलाकर, यूनिकॉर्न मास्ट का भारत आना न केवल एक तकनीकी उपलब्धि है, बल्कि यह चीन जैसी क्षेत्रीय शक्तियों के बढ़ते प्रभाव के बीच भारत और जापान के बीच गहरे होते भरोसे का प्रमाण है। समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में यह कदम आने वाले दशकों में भारतीय नौसेना को एक अत्याधुनिक और आधुनिक नौसैनिक शक्ति के रूप में स्थापित करेगा।
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